Monday, October 30, 2023

प्रोत्साहन: शैलेंद्र

"सफलता के पायदान"

प्राक्कन को लिखने का आग्रह प्राप्त हुआ,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार

कर लिया। आज पुस्तक संबंधित

पोस्ट को देख एक कविता लिखने

को प्रोत्साहित हो उठा।


मनोबल ऊंचा,

मनोबल बढ़ा,

दिशा निर्देशन

भी एक विधा....।।


दो पंक्तियां लिखना,

चंद अशआर गढ़ना,

अनुभवों को साझां कर,

Wednesday, October 18, 2023

सुखजीत की क्था शैली के बारे कुछ काविक भाव: शैलेंद्र


मैं फंस चला हूं....


कल्पना की गहराइयों को छूकर,

पूछ पूछ कर सच को अभिव्यक्त कर,

परिचय परिचर्चा में भी

अव्वलता पाकर,

सच झूठ के संघर्ष में फंसकर निकल जाना...

Monday, October 9, 2023

"भूकंप पर कविता" - डॉक्टर सलोनी चावला

 (धरती और मानवता का सन्देश) 


                   

लोगों ने कहा - अरे भूकंप आया !

मैं बोली - ना, किसी का इशारा आया। 


धरती मां ने हमें ज़रा प्यार से हिलाया,

जैसे ज़मीर को सोते हुए से जगाया। 


शायद आज धरती माँ का दिल भर आया।

और हम सभी तक यह पैगाम पहुंचाया। 


इस पैगाम से हमें यह एहसास दिलाया - 

Monday, September 18, 2023

एनसीपीए के संयोग से लिटरेरी वारियर ग्रुप द्वारा नीलम सक्सेना चंद्रा की नवीनतम पुस्तक "मोह से बंधी मैं" का सस्वर पाठ

ऐसे होते हैं, जो ज़िंदगी भर के लिए  अपनी छाप छोड़ जाते हैं। मैं बात कर रही हूं ऐसी ही एक रोमांचक शाम की जिसके एक एक पल में साहित्य के अनेक रंगों का मिलाप था। दिल को छू जाने वाली कविताएं और मोहित कर दे ऐसा नृत्य था।यह उत्कृष्ट कार्यक्रम प्रतिष्ठित एनसीपीए में दिनांक ६ सितंबर को आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत नीलम सक्सेना चंद्रा द्वारा लिखी गई पुस्तक "मोह से बंधी मैं" के वाचन के साथ हुई।नीलम को

Wednesday, September 6, 2023

सावन की छवि : रंजीत कुमार साहू

नभ ने संदेश भेजा सागर को 

तृषा से धरती जल रही है  
जीवन की डोर ढीली हो रही है 
प्राणी की  सांस  मचल रही है 
सौगात भेजा है सागर ने आज 
उमड़ पड़ा है बादलों का झुंड 
फिर आकाश  चूमने लगा है 


गुनगुनाने लगे पहाड़ी झरने 
भीगने लगे है  सूखे पत्थर 
जीवन की आस चैन भरी  सांस 
देखे नयन  भटके जिधर 
फैलाया  धरती आँचल अपना  
बिखरा हरा रंग उस पर 
फिर मौसम  घूमने लगा है 

Wednesday, June 21, 2023

डाँ. अंजना अनिल की कुछ कविताएं

  


आनंद

अजब अनूठी... मीठी

सिहरन सा... वो दिन

निराला होता है

जब पंछी के कलरव सी

विरल अभिव्यक्ति

कलम की नोक पर

आ बैठती है...

सूरज के उगते प्रकाश संग

रंग-बिरंगी आस्थाओं की अल्पना

घर द्वार

सजा देती है!

लगता है... ग्राम परिवेश

मानस के आकाश को

अपनी सुरम्यता से

आच्छादित कर देता है...

Monday, April 10, 2023

रंजीत साहू की दो कवियाएँ


गुमसुम हुई शाम सुहानी 


फिर बहकने लगा  फागुन देखो,


टेसू के पेड़ों  से गुजर गया I


ढलती शाम की जलती किरणों में,


इश्क़ का हुनर  बिखर गया !



एक कश्मकश शुरू हुई  दिल में, 


भूलने और याद करने  में I


 फर्क सब कुछ मिटने  लगा है, 


मिट जाने  या ज़िन्दा रहने में  I

Saturday, March 4, 2023

डॉ. धर्मपाल साहिल की तीन कवियाएँ

धर्मपाल साहिल
पत्धर

शीशे के घर में रहने वाले, 

करते हैं बात पत्थर की.

पत्थर जब पूजा गया तो, 

बढ़ गई औकात पत्थर की...! 

वही मंदिर, वही मस्जिद

 और वही गुरुद्वारे में था, 

हर जगह नज़र आई, 

जात एक ही पत्थर की.....! 

शीशे का होकर रिश्ता, 

शीश महल जैसा था, 

हो गया चूर जब लगी, 

 उसे घात पत्थर की...! 

पत्थरों के शहर में , 

 पत्थर जैसे लोग मिले, 

 फलदार पेड़ों को मिली, 

Thursday, March 2, 2023

'शिखर'- शैलेंद्र कपिल

 (आज मेरी सेवानिवृत्ति का एक वर्ष पूरा हो गया है)


शिखर

परिवर्तन क्या है, बेहतरीन एहसास हो रहा है

ज़िन्दगी का हर  पड़ाव  प्रभावशाली रहा है,

अनुभवों को मैंने हर स्तर पर सांझा किया है

उम्मीद, उल्लास और उमंग से

जीने की मन में आज भी ललक जिंदा है।


जिंदगी को एक बात और कहनी है,

उम्मीद रखकर जीनी आगे बढ़ रही जिंदगानी है,

अपराध बोध से उठकर के हमें जीना है

Tuesday, February 28, 2023

भारतीय कविता आंदोलनों के जन्मदाता : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

(शैलेंद्र , प्रयागराज)

सूर्यकांत  त्रिपाठी निराला जी का आज 123वां जन्मदिन है ।आज ही अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस एवं बसंत ऋतु का दौर भी है।

हिंदी साहित्य के छायावाद के चार कवियों, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा के साथ सूर्यकांत जी प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने बंग्लाभाषी होते हुए भी हिंदी साहित्य की,और  गीत, कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध आदि विधाओं में  रचनाएं सृजित कर छायावाद व परवर्ती काव्य आन्दोलनों के साहित्यकारों का मार्ग दर्शन किया।

सूर्यकांत जी का जन्म रविवार के दिन बंगाल की महिषादल रियासत, मिदनापुर में हुआ। रविवार के दिन पैदा होने के कारण उनका नाम सूर्यकांत रखा

Monday, February 27, 2023

'फ़र्जी'

मैं जब भी उनकी दुकान पर जाता 

वे नामी बाबाओं के 

वीडियो देखते - सुनते हुए ही मिलते थे।

उनमें से कुछ बाबा आज ---- की हवा खा रहे हैं।

आज जब मैं उनकी दुकान पर पहुंचा 

तब भी वे कोई वीडियो ही देख रहे थे। 

मैने पूछा- कौन से बाबा को देख - सुन रहे हैं ?

वे बोले  - अरे नहीं, पिक्चर चल रही है। 

मैने पूछा - कौन सी ?

तो वे बोले  -  फर्जी।


(राजेन्द्र ओझा, रायपुर,  छत्तीसगढ़)





Thursday, November 24, 2022

हरेंद्र कैसे बनी 'फ्लोरेंस नाइटेंगल' पुरस्कार की हासिल


 "सेवा तां मेरे खून विच है जी" यह कहना है हरिंदर   कौर का जिन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने हाल ही में फ्लोरेंस नाइटेंगल राष्ट्रीय पुरस्कार से  नवाजा है। गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल सेक्टर 16 में  नरसिग ऑफिसर के रूप में कार्यरत हरिंदर को उनकी श्लाघनीय सेवाओं के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।

पुरस्कृत होने पर  गदगद हरिंदर का कहना है  कि किसी की सेवाओं को इस तरह मान्यता दी जाए तो उसको और भी समर्पण भाव से सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। शेष लोग भी अच्छे काम के लिए प्रेरित होते हैं।

उनका कहना था कि वह सेवा के जज्बे को लेकर ही बड़ी-बड़ी हैं। उनके दादा पिता भाई व परिवार के अन्य लोग जन सेवा ही करते और कर रहे हैं । उनके अनुसार जब उन्होंने जी एन एम कोर्स पूरा किया तो पिताजी ने सिर पर हाथ रख कर कहा था पुत अपने जीवन को समाज सेवा में लगा दो। बडहेड़ी  बटेरला सेक्टर 41 चंडीगढ़  में जन्मी हरिंदर नेसे क्टर 21 के मॉडल स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद एमसीएम कॉलेज से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट राजेंद्र मेडिकल कॉलेज पटियाला से 1990 र्में जीएमएन का कोर्स किया। इसके बाद वही नियुक्त हो गई । वर्ष 2001 से सेक्टर 16 के सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं।

मानव सेवा का कार्य क्योंकि हरिंदर कौर ने शौक से अपनाया था इसीलिए उन्होंने नौकरी पूरी तन्मयता से करने का बीड़ा उठाया हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती कोरोना कॉल में आई । चंडीगढ़ का पहला कोरोना मरीज मनदीप उन्हीं के अस्पताल में आया था और उन्होंने बाकी टीम सदस्यों के साथ उसके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी ।

चंडीगढ़ की स्वास्थ्य व परिवार कल्याण निदेशक डॉक्टर अमनदीप कौर कंग  उनकी लगन देखते हुए हरिंदर कौर को कोविड- प्रभावित गर्भवती महिलाओं की सेवा के लिए मुझे गायनी यूनिट में ले आई । इसके लिए अस्पताल में विशेष प्रसूति कक्ष बनाने में भी हरिंदर कौर ने बढ़-चढ़कर योगदान किया।

हरिंदर कौर बताती हैं कि  अस्पताल में कोविड-19 रोगियों के लिए क्यूबिकल्स के निर्माण के दौरान उन्होंने लेबरके साथ मिलकर काम किया।

कोरोना जितना बड़ा चैलेंज था उतना ही उन्होंने खुद को इसके मरीजों के उपचार के लिए तैयार किया। कोविड-19 प्रभावित गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी व प्रसूति के बाद उनकी और नए जन्मे बच्चों की देखभाल के लिए उन्होंने इनके साथ अपने आपको भी पूरी तरह समर्पित कर दिया। ड्यूटी के समय का कोई ध्यान ना करते हुए उन्होंने दिन रात सेवा की। जब वह थकावट से गिर जाती तो उनके सहयोगी चिकित्सक उन्हें उठाते और वह फिर नए उत्साह से उपचार कार्य में लग जाती। इस दौरान डॉ रमनदीप कौर ,डॉ सुमन, डॉक्टर बरिंदरजीत कौर, डॉक्टर सपना, डॉ अपूर्वा, डॉक्टर गुन्चु और सिस्टर गुरमीत ने बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई। इस दौरान हरिंदर कौर को कई कई दिन अस्पताल में ही रहना पड़ता।

हरिंदर कौर को इस बीच परिवार का भी पूरा सहयोग मिला । थकी मांदी मोहाली में अपने घर पहुंचती तो सरकारी सेवा में कार्यरत पति और बेटे का पूरा साथ मिलता। यह लोग उनकी ड्यूटी को समझते   इसीलिए इसे निभाने में उनका पूरा साथ देते।

कोरोना रोगियों के उपचार में सेक्टर 16 का अस्पताल काफी मशहूर हो गया था । चंडीगढ़ के अतिरिक्त मोहाली पंचकूला और आसपास के लोग भी कोरोना उपचार के लिए इसी अस्पताल में भेजे जाने लगे। हरिंदर कौर के अनुसार इस दौरान कोविड-19 प्रभावित करीब ढाई सौ गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी इसी अस्पताल में करवाई गई । उनका कहना है कि उनकी ही टीम ने सामान्य प्रसूति के अलावा इन महिलाओं के सिजेरियन बी करवाए । प्रसूति के बाद मां और बच्चे की देखभाल भी पूरी निष्ठा के साथ की गई ।

हरिंदर कौर की अथक सेवा को देखते हुए पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने 26 जनवरी , 2020 को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुरस्कृत किया ।

राष्ट्रीय लक्ष्य कार्यक्रम के तहत जब मेटरनिटी केयर प्रोग्राम शुरू किया गया तो सेक्टर 16 अस्पताल की टीम की हरिंदर कौर मेंटर रही ।

इतनी सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति से पुरस्कार तो मिला ही साथ में अन्य संगठनों ने भी सम्मानित किया है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल और ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन भी उन्हें नवाज चुके हैं । नगर निगम  मोहाली, सेक्टर 41 बटेरला उनके पैतृक गांव के संगठन , सीनियर सिटीजन एसोसिएशन, मोहाली ने भी उन्हें सम्मानित किया है। सेक्टर 49 के गुरुद्वारा चरण  कंवल साहब और सेक्टर 16 अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्टाफ संगठनों ने भी उनका अभिनंदन किया है ।

 हरिंदर कौर का कहना है कि पुरस्कार प्राप्ति मेरे जीवन के गौरवपूर्ण क्षण है । मुझे रब से और क्या चाहिए। मेरे काम को मान्यता मिली है । अस्पताल के चिकित्सकों और मेरे साथियों का मुझ पर पूरा विश्वास है इसीलिए कोविड-19 के चुनौतीपूर्ण दौर में मुझे बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई और उत्साहित किया गया। राष्ट्रपति महोदय ने पुरस्कृत करने के समय मुझे कहा था कि रिटायरमेंट शब्द कभी जिंदगी में मत  लाना और ताउम्र सेवा करते रहना। यह बहुत बड़ी बात है मेरे लिए । मैं भी जिंदा जी महिलाओं के कल्याण और स्वास्थ्य पर ध्यान देती रहूंगी । "रब मैनू समरथा देवे।"


     अवतार सिंह भंवरा







 


Sunday, November 13, 2022

'डा: आरती कुमारी' सहज में ढली सुर्जन परिक्रिया।

डॉ० आरती कुमारी हिंदी, उर्दू व अंग्रेज़ी में समान लिख रही हैं और अनेक साहित्य पत्रों में छप भी रही हैं। कमाल की बात तो यह है की वह तीनों भाषा मे अपनी सुर्जनात्मिक उर्जा को प्रकट करने के लिए समान महारत रखती हैं। वह एक कवि, ग़ज़लगो के साथ शिक्षाविद भी हैं। उनकी कई रचनाएँ व आलेख राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनका काव्य संग्रह ' धड़कनों का संगीत' राजभाषा विभाग द्वारा सम्मानित एवं अभिधा प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। उनके संपादन में 'ये नए मिज़ाज का शहर है' और 'बिहार की महिला ग़ज़लकार' ग़ज़ल संग्रह आया है। उनकी रचनाएँ आकाशवाणी और दूरदर्शन से नियमित प्रसारित होती रहती हैं। आरती कुमारी साहित्य त्रैमासिक पत्र मेघला के संपादकीय मण्डल से जुड़ी रही हैं। उनसे एक साहित्य कान्फ्रेंस में मेरी मुलाकात हुई थी। हिंदी कविता और ग़ज़ल में उनका एक अलग स्थान है। उनके लिए साहित्य रचना एक दिव्य कर्म जैसा है।

Saturday, August 6, 2022

काला धुआं - लघु कथा :- सुजाता


ऊपर बैठे आकाश ने भी उनकी हां में हां मिलाई। हवा, पानी, ज़मीन बोले, तुम तो मज़े में हो भई, इंसान के हाथ तुम तक  नहीं पहुंच सकते।

आकाश ने अपने दिल में हुआ बड़ा सा छेद दिखाते हुए कहा, तुम्हें शायद मालूम नहीं कि इंसान के स्वार्थ की लपटें कितनी ऊपर तक पहुंच रही हैं।भट्टी में धू –धू जल रहे हैं पुतले, किसी दिन इन्हीं लपटों का शिकार हो जाएगा वह। खतरे का बिगुल बज रहा है और काला धुआं फैलता जा रहा है।

पानी के चेहरे पर उदासी की लकीरें साफ़ दिखाई दे रही थीं। हवा ने पूछा–क्या बात है भाई?  मेरा दर्द बहुत पुराना है–पानी बोला ,बरसों से इंसान मेरा खून चूस रहा है।वह जल–भक्षी हो गया है, इतना स्वार्थी कि मेरे शरीर की आखिरी बूंद तक निचोड़ लेना चाहता है।अब और बर्दाश्त नहीं होता।


पानी की दुःख भरी कहानी सुन कर हवा की आंखें भीग गईं –मेरी भी दास्तां कुछ ऐसी ही है भाई।

देवेंद्र कुमार 'अंबर' (हरियाणा) की कवियाएँ

बच्पन से कविता लिखने का शौक रखने वाले देवेन्द्र कुमार (अंबर) ने श्री ओमप्रकाश दहीया गाँव कितलाना जिला भिवानी, हरियाणा के प्रागंण में 10 मई 1978 को जन्म लिया। प्राथमिक शिक्षा गाँव कितलाना की राजकीय प्राथमिक पाठशाला से उत्तीर्ण की व माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय देवराला जिला भिवानी मे दाखिला प्राप्त किया। विज्ञान विषय से उच्च माध्यमिक शिक्षा ऊत्तीर्ण कर National Institute of Technology, Kurukshetra से विद्धूत अभियांत्रिकी से स्नातक की उपाधि प्राप्त कर निजी क्षेत्र में बतौर अभियंता कार्य किया । तत्पश्चात स्वयं संचालित निर्माण व अभियंत्रिकी सलाहाकार के रुप में निजी संस्था के तहत सेवा में लगन हैंं । 

*कुरुक्षेत्र ये उदित युग का


ये काल, अपभ्रंश की धारा

परिवर्तन की है ये पृष्टभूमि 

कर्म -भुमि है  ये रण-भूमि 

कुरुक्षेत्र ये उदित युग का।


निःशस्त्र तुमको लड़ना है

महीधर बन कर अड़ना है

सुगम भाव से  करना तुझे

आगाज़ अविकल्प युद्ध का


अमन-क्रांति के अंकुर सींच 

शस्य शांति की उन्नत करना

प्रेम महुर देकर खरपात को 

रखना ध्यान आत्म शुद्ध का


अग्रज सहचर अनुज बहुतेरे

वर्य बनके अविज्ञ मन हरना

चक्रव्यूह के षड़यंत्र को भेद

Monday, July 18, 2022

'अजय' चयनित कविताएं–एक सफ़र- सुजाता


सुजाता 
अजय जी की कविताओं में हिमाचल की मिट्टी की सौंधी गंध है।पहाड़ी गांव , जनमानस , रीति रिवाज़ , परंपराएं ,जीवन शैली उनकी कविताओं में उभर कर आए हैं, लेकिन वे अनुभव और चेतना के परों पर सवार बहुत दूर निकल गई हैं। वे समकाल की बुलंद आवाज़ हैं, जो अपने समय और उससे जुड़े यथार्थ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
संग्रह की पहली कविता   ‘प्रार्थना’ में गजब की सादगी है।

एक आम ग्रामवासी के मुख से सुनिए –

ईश्वर/मेरे दोस्त/मेरे पास आ/यहां बैठ/बीड़ी पिलाऊंगा/चाय पीते हैं । सादगी की यह झलक उनकी और भी कविताओं में मिलती है–‘एक आदमी होता था’  की कुछ पंक्तियां हैं  पहले एक पहाड़ होता था/एक आदमी होता था/लेकिन आदमी इतने ज़ोर से बहा /कि नदी सो गई।

‘भोजवान में पतझड़’ में कवि की मानवीय संवेदनाओं का विस्तार झलकता है– लेटी रहेगी एक कुनकुनी उम्मीद/मेरी बगल में/एक ठंडी मुर्दा लिहाफ के नीचे/कि फूट जाएंगी कोंपले/लौट आएगी अगले मौसम तक/भोजवन में जिंदगी।

आदिवासी बहनों के लिए लिखी कविता ‘ब्यूंस की टहनियों ’ में यही संवेदना औरत के प्रति है –जो जितना दबाओ झुकती जाएंगी/जैसा चाहो लचकाओ लहराती रहेंगी/जब सूख जाएंगी कड़क कर टूट जाएंगी।

क्या स्त्री– पुरुष बराबर हैं? क्या सच है कि औरत सामाजिक  और आर्थिक शोषण का शिकार नहीं? यह कविता ऐसे कई सवालों पर और बड़ा सवाल खड़ा करती है।

कविताएँ- आरती कुमारी, बिहार।

डॉ० आरती कुमारी हिंदी, उर्दू व अंग्रेज़ी में समान अधिकार रखती हैं। वह एक कवि, ग़ज़लगो के साथ शिक्षाविद भी हैं। उनकी कई रचनाएँ व आलेख राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनका काव्य संग्रह ' धड़कनों का संगीत' राजभाषा विभाग द्वारा सम्मानित एवं अभिधा प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। उनके संपादन में ये नए मिज़ाज का शहर है और बिहार की महिला ग़ज़लकार  ग़ज़ल संग्रह आया है। उनकी रचनाएँ आकाशवाणी और दूरदर्शन से नियमित प्रसारित होती रहती हैं।

स्मृति 


आज

कई दिनों बाद

स्मृति के जादूगर ने

पलट डाले

जिंदगी की किताब के

कई पृष्ठ ..

वक्त की स्याही से लिखे

उन पन्नों पर दिखे

अठखेलियाँ करते शब्द 

अनुशासित भाव

कुछ स्पंदित क्षण

सूखे गुलाब के निशान 

और

आँखों की नमी से धुले

तुम्हारे ख़त...


पुल


विश्वास की ईंटों को जोड़कर

प्यार के गारे से सना

चलो बनाएँ  

दोहा गीतिका- शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' , राजस्थान।

 

नाम~ शकुंतला अग्रवाल "शकुन", लघु कथा,व  छांदसिक रचनाएँ ।

प्रकाशित कृतियाँ- 1.दर्द की परछाइयाँ (2017), 

2. "बाकी रहे निशान" दोहा संग्रह( 2019) , 

3."काँच के रिश्ते" दोहा संग्रह(2020),

4."भावों की उर्मियाँ" कुंडलियाँ  संग्रह (2021) 5. 'लघुकथा कौमुदी' लघुकथा संग्रह(2022)

व अनेक साझा संग्रह

प्रकाश्य:-घनाक्षरी,गीत, कविता व एकांकी संग्रह। 

सम्मान व अलंकरण - हिंदी दिवस पर जिला साहित्यकार परिषद भीलवाड़ा द्वारा "साहित्य सुधाकर"-2018

विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा~ 'विद्यावाचस्पति' सम्मान-2018 में

द्वारकेश साहित्य परिषद कांकरोली द्वारा सम्मानित- 2019, काव्यांचल ग्रुप- 'छंद-रथी'-2019, व फरवरी 2020 में दोहा शिरोमणि सम्मान व अन्य कई सम्मान।


 

दोहा


छंदाधारित गीतिका


मैं मूरख कैसे करूँ, शिव जी का गुणगान?

शब्द पड़े हैं मौन सब,नहीं छंद का ज्ञान।

*

नश्वर जग में हो तुम्हीं,सबके तारणहार,

जान गया इस सत्य को,वो सच्चा- इंसान।

पग-पग पर धोखे यहाँ,कैसे हो विश्वास?

परख सके सबको 'शकुन',ऐसा दो संज्ञान।

*

माया डसती नित यहाँ, घायल होती रूह,

Saturday, April 23, 2022

अपनी चाय की चुस्की भरो धीरे_धीरे/ मज़े से : प्रोफ: ली तसु पेंग

अनुवाद: सुजाता

कोई नहीं जानता
कब रुखसत का समय आ जाए और उस मौज को जीने का समय ही न मिले
तो बसअपनी चाय की चुस्की भरो
सुकून से/ धीरे _धीरे
_
जीवन बहुत छोटा है
मगर लगता बेहद लंबा
बहुत कुछ है करने को
क्या सही क्या गलत
उलझे रहते तुम इसी में
इससे पहले कि देर हो जाए और  
अंत समय आ जाए
अपनी चाय का मज़ा लो
घूंट_घूंट
_
चंद दोस्त शेष रहते

कविताएँ : अरतिंदर संधू

 

कुदरत के रंगों का जलाल था 

बराबरी थी,एकरसता थी 

पेड़ थे,बूटियाँ थी

स्थान था हरेक वस्तु का

कुदरती रचना थी 

नर और मादा होने की

बिलकुल उतने ही बराबर थे सब

जितना बराबर था होना उनका 


मनुष्य का आना धरती पर

ले कर आना था 

विशेष क़िस्म की समझदारी 


समझदारी ने की कुछ बाँटें 

निश्चित किये स्थान 

सब जीव निर्जीव वस्तुओं के

बंट गया तथ्य होने रहने का

नर और मादा होने में 

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

चार्ली चैपलिन की याद में,  ------ सपनों में भी  यथार्थ में भी, कारण से भी  बिना किसी कारण  भी मैं खुश रहना चाहता हूं, पैदल चलकर भी, एकेला चल...