Thursday, April 16, 2026

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल


चार्ली चैपलिन की याद में,

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सपनों में भी 

यथार्थ में भी,

कारण से भी 

बिना किसी कारण 

भी मैं खुश रहना चाहता हूं,


पैदल चलकर भी,

एकेला चलकर भी,

हाथों में हाथ डालकर भी

मैं बस खुश रहना चाहता हूं,


मैं पढ़ता जाता हूं,

समझ आए या न आए,

आगे बढ़ता जाता हूं,

मैं फिलहाल प्रत्यक्ष रहना चाहता हूं 

क्योंकि मैं खुश रहना चाहता हूं,



चेहरे बना बना कर भी,

जीवों की आवाजें निकालकर भी,

अभिनय की मिसाल पेश कर भी,

अभिनय को सराह कर भी,

मैं प्रसन्न होकर ख़ुश रहना चाहता हूं,


मैं निर्विघ्न तरीके से,

हर दिन को दिवस मनाकर के

रेल की खिड़कियों से निहार करके,

सभी नदी नाले, पेड़ पोधों से संवाद 

करके मैं अन्ततः प्रसन्न रहना चाहता हूं।


परिवर्तन 

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शहरीकरण का आधार, 

गांवों का नियोजित विस्थापन,

पेड़ों की करूणामयी कटाई,

नयी विपत्तियां साथ

लाई।


गौरइया लुप्त हो चली है,

पीने के पानी की आपूर्ति 

नियमित हो चली है,

भंडारण की जरूरत 

आने पड़ी है,

सुबह में निशतब्धता 

में कोई गुंजन नहीं है।


गगनचुंबी इमारतों का

बोलबाला है,

भूकंपों का कहर रोज 

सुनने में आता है,

बिजली का प्रयोग बढता

चला जाता है,

आग से बचना है,

एक नयी व्यवस्था का 

आगमन नजर आता है।


या तो बहुत धूप आती है,

या फिर धूप ही नहीं 

आती है,

जांच करवाने पर आमजन में विटामिन 

डी की कमी पायी जाती है,

सुबह शाम दवाई की खुराक बढ़ती चली जाती है,


क्या उपाय सुझाया जाए,

जब घर से काम करने 

की इजाजत है,

तो फिर अपनी जन्मस्थली को वापस 

चला जाए,

मन ही  मन में कोविड को शत् शत् 

धन्यवाद किया जाए।




शैलेंद्र क र विमल।






Saturday, July 5, 2025

डॉ संगीता सिंह की कुछ कविताएं , राजस्थान


डॉ संगीता सिंह का जन्म 26 फरवरी को हुआ था। ये स्वर्गीय श्री नरेंद्र  बहादुर सिंह एवं  श्रीमती आशालता सिंह की संतान हैं माता पिता राजकीय सेवा में क्रमशः  अंग्रेजी एवं हिंदी के व्याख्याता रहे। घर का वातावरण पूर्णतया साहित्यिक रहा।ये कोटा राजस्थान की निवासी हैं। इन्होंने  राजस्थान विश्वविद्यालय से अंग्रेजी  साहित्य की पढ़ाई  तथा पी एच डी की है। इसके अतिरिक्त इन्होंने विद्यालय  में हिंदी साहित्य,  अंग्रेजी साहित्य तथा महाविद्यालय मेंदर्शन शास्त्र, धर्मशास्त्र एवं संस्कृत का भी अध्ययन किया है।ये  पैंतीस वर्षों से लिख रही हैं। इन्होंने अपनी पहली रचना का सृजन 1989 में किया था। ये अब तक लगभग 50 रचनाओं का सृजन तथा लगभग 100 रचनाओं का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कर  चुकी हैं।  यह पुस्तक समीक्षा भी लिखती हैं। इनके अनुसार लेखन एक  ऐसा माध्यम है जिससे आप अपने मन के भावों और विचारों को व्यक्त कर सकने के साथ साथ समाज में जागरूकता ला सकते हैं। ये   उच्च शिक्षा विभाग  (सरकारी) की सेवानिवृत्त  प्रोफेसर (अंग्रेजी विभाग)हैं ।  इनके मनपसंद रचनाकार/ लेखक/लेखिका /कवि/कवयित्री /उपन्यासकार/कथाकार रामधारी सिंह " दिनकर", हरिवंश राय बच्चन, शिवानी हैं। इनका मनपसंद उपन्यास  शिवानी का ' कैंजा' और अंग्रेजी में जार्ज ऑरवेल का    ' नाइनटीन ऐटी फोर 'हैं । इन्हें रामधारी सिंह दिनकर की  ' समर शेष है' कविता, हरिवंश राय बच्चन की कविता ' पथ की पहचान', भगवद्गीता एवं  रामचरित मानस पढ़ना  पसंद हैं। ये हिंदी, अंग्रेजी के साथ राजस्थानी में भी कविताएं लिखती हैं। इन्हे पद्य विधा में लिखना पसंद हैं। ये अंग्रेजी, हिंदी एवं राजस्थानी भाषाओं में रचनाओं का सृजन करती हैं। इनके द्वारा सृजन की हुई इनकी मनपसंद रचना 'अमन का  पैगाम', अंग्रेजी में Walk  on the Tight Rope'   राजस्थानी भाषा की कविता  'अब तो मिटा लै कालो टीको'  हैं। ये अब तक  'आर्यन लेखिका मंच ' के कवि सम्मेलन में जुड़कर उसकी शोभा व गरिमा बढ़ा  चुकी हैं। ये 'अंतर्राष्ट्रीय काव्य साधिका मंच' तथा 'राजस्थानी लेखिका संस्थान', 'मां के नवरात्रे कविता संकलन आदि  से जुड़ी हुई/ हैं। इनकी रचनाएं डॉ प्रभात कुमार सिंघल के संकलन  'नारी चेतना की साहित्यिक उड़ान'  में प्रकाशित हो चुके हैं। इन्हें अब तक  कई मंचों पर  सम्मानित किया जा चुका है। अब तक इनके तीन अंतरराष्ट्रीय  कविता संग्रहों  के अनुवाद संकलन -' मेरी आत्मा का रत्न ', 'विरह की वेदना'  एवं ' सरगोशियां' प्रकाशित हो चुके हैं जिनका इन्होंने अंग्रेजी से हिंदी भाषा में अनुवाद किया है।

सच्चा सुख

क्या तुमने चखा है कभी सुंदर अनोखा स्वाद

छप्पन भोग, षड-रस भोजन

 सोने के थाल से भी बढ़ कर

Saturday, February 1, 2025

रीतू कलसी की कुछ कविताएं

 

हम और तुम

भले चाहें  युद्ध न हों

पर युद्ध होंगे 


और मरना किसे 

इस युद्ध में यकीनन

हमको तुमको


नेता आए,नेता गए 

दर्ज हुआ युद्ध इतिहास मे


तो युद्ध होंगे

इतिहास मे आने को

Saturday, December 21, 2024

'ज़रूरत भर सुविधा' चन्द्रेखा ढडवाल

चन्द्रेखा ढडवाल जी की काव्य पुस्तक 'ज़रूरत भर सुविधा'मु झे अमृतसर में रह रही हिमाचल मूल की कवित्री सुजाता जी से प्राप्त हुई। यह पुस्तक मुझे देते हुए उन्होंने इसे पढ़ने के लिए भी कहा। लेकिन और झमेलों ने मुझे ऐसा उलझाया की लगभग दो महीने यह पुस्तक मेरे ट्रैवल बैग में पड़ी मेरे साथ-साथ सफ़र करती रही।फर मैने इस पुस्तक को पढ़ना शुरू किया तो एक एक कर सारी कविताएं पढ़ डाली। मैने इस पुस्तक के सरवर्क को काफी देर निहारा लेकिन मुझे इसकी समझ नहीं आई। लेकिन एक बात मेरी समझ में आ गई की सूक्ष्म कला बारीक बुद्धि वालों के लिए है। इसमें कुछ कटे हुए पेड़ों के तने दिखाई दे रहे हैं।  एक कटे हुए पेड़ के तने पर एक हाथ की आकृति दिखाई दे रही है। शायद यह संकेत करता है की हम सिर्फ प्रकृति पर परिहार नहीं कर रहे बल्कि इंसान खुद अपनी जड़ें काट रहा है। प्रतिरोध तो प्रकृति लेगी। सरवर्क के अर्थ और भी हो सकते हैं। फैली कविता पेड़ सुनों भी इसी और इशारा करती है:


किन्हीं पलों विशेष में
हो नहीं सकते ऐसे वायवी
कि तुम्हारे आर  पार होती

Sunday, July 28, 2024

चेन सु चिन की कुछ कविताएं

 सेंटियागो में आंखे

( ला चेस्कोना में)


यहां हर तरफ आखें हैं

चुफेरे हैं आखों के बने चिन्ह

किसी सख्त प्रेमी की दबंग आखें

अंदर कमरे से घूर रही हैं

बगीचे की तरफ

यह जानने के लिए की

प्यार अभी तक कायम है की नही


आखें तो प्यार की तलाश में

स्थिर हो गई लगती हैं

अंधे प्यार की चाह


ओ! मेरे नेरुदा

यहां पर बहुत सारी आखें हैं


आखें , आखें और आखें

कौन सी हैं मेरी

और कौन सी हैं

तुम्हारी आंखे


क्या हम एक जोड़ी 

Saturday, March 16, 2024

'नादान आदमी का सच ’ हमारा तुम्हारा सच - सुजाता


अम्बिका दत्त जी का काव्य –संग्रह ’नादान आदमी का सच ’ पढ़ते ही ताज़ी हवा के झोंके की छुअन सी महसूस होती है। हिंदी और राजस्थानी में उनके नौ पुस्तक–संग्रह (ख़ास तौर पर कविताएं) प्रकाशित हो चुके हैं और वे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।’नादान आदमी का सच ’ उनका दसवां काव्य –संग्रह जीवन की विविधता  व नवीनता लिए हमारे समक्ष है।

’ प्रार्थना के लिए प्रार्थना ’ संग्रह की पहली कविता है। एक संवेदनशील व्यक्ति होने के नाते कवि कामना करता है कि लोभ, लिप्सा, मद –मोह, अभिमान और दिखावे से बच कर प्रार्थना जीवन में सहज –शुभ कर्म 

बन कर उभरे।


अम्बिका दत्त जी की कविताओं में गज़ब की सादगी है तथा चिंता भी कि इन दिनों शरीफ़ लोग कितने निरीह व

Saturday, February 3, 2024

एंजेला कोस्टा की कुछ अनुवादित कविताएं

एंजेला कोस्टा का जन्म 1973 में अल्बानिया में हुआ था। वह 1995 से इटली में रह रहे हैं। उन्होंने 11 पुस्तकें प्रकाशित की हैं जिनमें शामिल हैं: अल्बानिया और इटली में उपन्यास, कविताएं और परियों की कहानियां। एंजेला कोस्टा अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ऑर्फ्यू की संपादक हैं। वह अल्बानिया, कोसोवो, इटली, बेल्जियम, ग्रीस, लेबनान, संयुक्त राज्य अमेरिका और मोरक्को में विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के लिए एक अनुवादक और पत्रकार भी हैं। आप समाचार पत्रों कैलाब्रिया लाइव और एलेसेंड्रिया टुडे, समाचार पत्र ों नेसियोनल, ले रेडिसी आदि के लिए लेख लिखते हैं।


मेरी माँ के लिए


मैंने कई पंक्तियाँ लिखीं

आँसुओं के लिए अंतहीन छंद,

दर्द प्रेम

तुम भी कहाँ हो मेरी माँ!

मैं तुम्हारी बंद आँखों को एक बार अच्छाई से भरकर चूम लेता हूँ!

मैं तुम्हारे अभी भी गर्म हाथों को वैसे ही सहलाता हूँ 

जैसे तुमने एक बार किया था;

मैं तुम्हारे असमय बुढ़ापे की झुर्रियों को अपनी उँगलियों से छूता हूँ

तुम्हारी सुस्ती को स्वीकार कर पाने के कारण,

Monday, January 1, 2024

शशि पाठक की कुछ नई कविताएं


1----

फर्क होता है

खुश होने और सुखी होने में ।

ज़रुरी नहीं कि

हर सुखी व्यक्ति खुश भी हो  ।

खुशी मन की एक स्थिति है ,

जबकि सुख

सुविधाओं पर आश्रित है ।

सुविधाएं खुशी नहीं

सुख देती हैं ।

अभावग्रस्त व्यक्ति भी 

खुश हो सकता है

और

सुखी व्यक्ति भी नाखुश रह सकता है ।

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ज़िन्दा है इंसान

सपनोँ के सहारे

Saturday, November 11, 2023

नसीहत का सौदा : लघु कथा, सुजाता

  

मां हाथ में एक रुपए का सिक्का लिए बाज़ार निकली।बच्चे की ललचाई आंखें सिक्के पर टिकी थीं–मां! आते समय कुछ लेते आना।राशन की दुकान पर लाइन लगी थी, ताक –झांक करने के बाद वह आगे बढ़ गई।मिठाई की दुकान पर मात्र भाव पूछा।आगे चौराहे पर नसीहतों की नीलामी हो रही थी,उसने सिक्का दे कर एक नसीहत खरीद ली "सहनशीलता अमूल्य

छोटा भी सुन्दर : रंजीत कुमार साहू

 

छोटे और दुर्बल का 
कभी न करो 
जाने अनजाने में 
उपहास  
छोटा सा दिया 
घनघोर अँधेरे में  
जगा जाता  है  
जीवन की   आस 

धीमा होता है पर 
बदल देता है  
रुख  मौसम का झोंका  
हवा का 
कौन कहता है  वो निर्बल होता है  
घूप में काम देता है दवा का 

छोटा सा ही होता है  सीपी सागर में, 
मोती  उस से भी है छोटा होता 

Monday, October 30, 2023

प्रोत्साहन: शैलेंद्र

"सफलता के पायदान"

प्राक्कन को लिखने का आग्रह प्राप्त हुआ,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार

कर लिया। आज पुस्तक संबंधित

पोस्ट को देख एक कविता लिखने

को प्रोत्साहित हो उठा।


मनोबल ऊंचा,

मनोबल बढ़ा,

दिशा निर्देशन

भी एक विधा....।।


दो पंक्तियां लिखना,

चंद अशआर गढ़ना,

अनुभवों को साझां कर,

Wednesday, October 18, 2023

सुखजीत की क्था शैली के बारे कुछ काविक भाव: शैलेंद्र


मैं फंस चला हूं....


कल्पना की गहराइयों को छूकर,

पूछ पूछ कर सच को अभिव्यक्त कर,

परिचय परिचर्चा में भी

अव्वलता पाकर,

सच झूठ के संघर्ष में फंसकर निकल जाना...

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

चार्ली चैपलिन की याद में,  ------ सपनों में भी  यथार्थ में भी, कारण से भी  बिना किसी कारण  भी मैं खुश रहना चाहता हूं, पैदल चलकर भी, एकेला चल...