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Monday, October 30, 2023

प्रोत्साहन: शैलेंद्र

"सफलता के पायदान"

प्राक्कन को लिखने का आग्रह प्राप्त हुआ,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार

कर लिया। आज पुस्तक संबंधित

पोस्ट को देख एक कविता लिखने

को प्रोत्साहित हो उठा।


मनोबल ऊंचा,

मनोबल बढ़ा,

दिशा निर्देशन

भी एक विधा....।।


दो पंक्तियां लिखना,

चंद अशआर गढ़ना,

अनुभवों को साझां कर,

Wednesday, October 18, 2023

सुखजीत की क्था शैली के बारे कुछ काविक भाव: शैलेंद्र


मैं फंस चला हूं....


कल्पना की गहराइयों को छूकर,

पूछ पूछ कर सच को अभिव्यक्त कर,

परिचय परिचर्चा में भी

अव्वलता पाकर,

सच झूठ के संघर्ष में फंसकर निकल जाना...

Thursday, March 2, 2023

'शिखर'- शैलेंद्र कपिल

 (आज मेरी सेवानिवृत्ति का एक वर्ष पूरा हो गया है)


शिखर

परिवर्तन क्या है, बेहतरीन एहसास हो रहा है

ज़िन्दगी का हर  पड़ाव  प्रभावशाली रहा है,

अनुभवों को मैंने हर स्तर पर सांझा किया है

उम्मीद, उल्लास और उमंग से

जीने की मन में आज भी ललक जिंदा है।


जिंदगी को एक बात और कहनी है,

उम्मीद रखकर जीनी आगे बढ़ रही जिंदगानी है,

अपराध बोध से उठकर के हमें जीना है

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

  गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...