दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

चार्ली चैपलिन की याद में,  ------ सपनों में भी  यथार्थ में भी, कारण से भी  बिना किसी कारण  भी मैं खुश रहना चाहता हूं, पैदल चलकर भी, एकेला चल...