Showing posts with label जिज्ञायासा खरबंदा. Show all posts
Showing posts with label जिज्ञायासा खरबंदा. Show all posts

Saturday, February 24, 2018

जिज्ञायासा खरबंदा,

जिज्ञायासा खरबंदा, शिक्षा : दसवीं (अध्ययनरत), सम्मान : ’सक्सेसर ऑफ फ्रीडम फाईटर एसोसिएशन’ एवं ’आचार्यकुल चण्डीगढ़’ द्वारा सम्मानित। अन्य : मंथन साहित्यिक संस्था चण्डीगढ़ की सदस्य। राष्ट्रीय कवि संगम, चंबा में सम्मिलित। अखिल भारतीय हिंदी.उर्दु कवि सम्मेलन में शामिल। एन.बी.टी. की पत्रिका में कविता प्रकाशित। दूरभाष : 9872221465
जिज्ञायासा खरबंदा,
कविता


अध्यापक
वह बहुत समझदार है।
उसे किताबें पढ़ना नहीं आता
पर,
वह लागों को,
अच्छे से पढ़ लेता है;
एक वक्त ही रहा उसका
बिन-माँगा, अनचाहा 
अध्यापक!

ऐतिहासिक मंथन
म्ेरे देश के भविष्य
और मेरे देश के इतिहास

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

  गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...