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Monday, July 18, 2022

कविताएँ- आरती कुमारी, बिहार।

डॉ० आरती कुमारी हिंदी, उर्दू व अंग्रेज़ी में समान अधिकार रखती हैं। वह एक कवि, ग़ज़लगो के साथ शिक्षाविद भी हैं। उनकी कई रचनाएँ व आलेख राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उनका काव्य संग्रह ' धड़कनों का संगीत' राजभाषा विभाग द्वारा सम्मानित एवं अभिधा प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। उनके संपादन में ये नए मिज़ाज का शहर है और बिहार की महिला ग़ज़लकार  ग़ज़ल संग्रह आया है। उनकी रचनाएँ आकाशवाणी और दूरदर्शन से नियमित प्रसारित होती रहती हैं।

स्मृति 


आज

कई दिनों बाद

स्मृति के जादूगर ने

पलट डाले

जिंदगी की किताब के

कई पृष्ठ ..

वक्त की स्याही से लिखे

उन पन्नों पर दिखे

अठखेलियाँ करते शब्द 

अनुशासित भाव

कुछ स्पंदित क्षण

सूखे गुलाब के निशान 

और

आँखों की नमी से धुले

तुम्हारे ख़त...


पुल


विश्वास की ईंटों को जोड़कर

प्यार के गारे से सना

चलो बनाएँ  

Sunday, March 4, 2018

दो गज़लें- डॉ: आरती कुमारी,


डॉ० आरती कुमारी
गज़ल

दास्तां इश्क मोहब्बत की सुनाने वाले
 जाने किस देश गए पिछले जमाने वाले।।

कस्मों वादों की रेवायत तो अभी है लेकिन
अब कहाँ लोग हैं, वो वादे निभाने वाले।।

जिंदगी क्या है किसी ने नहीं समझा लेकिन
मौत आती है तो रोते हैं जमाने वाले।।

अब तो पलकों पे भी जलते नहीं अश्कों के चिराग
गर कभी जल भी गए, आए बुझाने वाले।।

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

  गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...