Saturday, February 3, 2024

एंजेला कोस्टा की कुछ अनुवादित कविताएं

एंजेला कोस्टा का जन्म 1973 में अल्बानिया में हुआ था। वह 1995 से इटली में रह रहे हैं। उन्होंने 11 पुस्तकें प्रकाशित की हैं जिनमें शामिल हैं: अल्बानिया और इटली में उपन्यास, कविताएं और परियों की कहानियां। एंजेला कोस्टा अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ऑर्फ्यू की संपादक हैं। वह अल्बानिया, कोसोवो, इटली, बेल्जियम, ग्रीस, लेबनान, संयुक्त राज्य अमेरिका और मोरक्को में विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के लिए एक अनुवादक और पत्रकार भी हैं। आप समाचार पत्रों कैलाब्रिया लाइव और एलेसेंड्रिया टुडे, समाचार पत्र ों नेसियोनल, ले रेडिसी आदि के लिए लेख लिखते हैं।


मेरी माँ के लिए


मैंने कई पंक्तियाँ लिखीं

आँसुओं के लिए अंतहीन छंद,

दर्द प्रेम

तुम भी कहाँ हो मेरी माँ!

मैं तुम्हारी बंद आँखों को एक बार अच्छाई से भरकर चूम लेता हूँ!

मैं तुम्हारे अभी भी गर्म हाथों को वैसे ही सहलाता हूँ 

जैसे तुमने एक बार किया था;

मैं तुम्हारे असमय बुढ़ापे की झुर्रियों को अपनी उँगलियों से छूता हूँ

तुम्हारी सुस्ती को स्वीकार कर पाने के कारण,

Monday, January 1, 2024

शशि पाठक की कुछ नई कविताएं


1----

फर्क होता है

खुश होने और सुखी होने में ।

ज़रुरी नहीं कि

हर सुखी व्यक्ति खुश भी हो  ।

खुशी मन की एक स्थिति है ,

जबकि सुख

सुविधाओं पर आश्रित है ।

सुविधाएं खुशी नहीं

सुख देती हैं ।

अभावग्रस्त व्यक्ति भी 

खुश हो सकता है

और

सुखी व्यक्ति भी नाखुश रह सकता है ।

2-----

ज़िन्दा है इंसान

सपनोँ के सहारे

Saturday, November 11, 2023

नसीहत का सौदा : लघु कथा, सुजाता

  

मां हाथ में एक रुपए का सिक्का लिए बाज़ार निकली।बच्चे की ललचाई आंखें सिक्के पर टिकी थीं–मां! आते समय कुछ लेते आना।राशन की दुकान पर लाइन लगी थी, ताक –झांक करने के बाद वह आगे बढ़ गई।मिठाई की दुकान पर मात्र भाव पूछा।आगे चौराहे पर नसीहतों की नीलामी हो रही थी,उसने सिक्का दे कर एक नसीहत खरीद ली "सहनशीलता अमूल्य

छोटा भी सुन्दर : रंजीत कुमार साहू

 

छोटे और दुर्बल का 
कभी न करो 
जाने अनजाने में 
उपहास  
छोटा सा दिया 
घनघोर अँधेरे में  
जगा जाता  है  
जीवन की   आस 

धीमा होता है पर 
बदल देता है  
रुख  मौसम का झोंका  
हवा का 
कौन कहता है  वो निर्बल होता है  
घूप में काम देता है दवा का 

छोटा सा ही होता है  सीपी सागर में, 
मोती  उस से भी है छोटा होता 

Monday, October 30, 2023

प्रोत्साहन: शैलेंद्र

"सफलता के पायदान"

प्राक्कन को लिखने का आग्रह प्राप्त हुआ,जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार

कर लिया। आज पुस्तक संबंधित

पोस्ट को देख एक कविता लिखने

को प्रोत्साहित हो उठा।


मनोबल ऊंचा,

मनोबल बढ़ा,

दिशा निर्देशन

भी एक विधा....।।


दो पंक्तियां लिखना,

चंद अशआर गढ़ना,

अनुभवों को साझां कर,

Wednesday, October 18, 2023

सुखजीत की क्था शैली के बारे कुछ काविक भाव: शैलेंद्र


मैं फंस चला हूं....


कल्पना की गहराइयों को छूकर,

पूछ पूछ कर सच को अभिव्यक्त कर,

परिचय परिचर्चा में भी

अव्वलता पाकर,

सच झूठ के संघर्ष में फंसकर निकल जाना...

Monday, October 9, 2023

"भूकंप पर कविता" - डॉक्टर सलोनी चावला

 (धरती और मानवता का सन्देश) 


                   

लोगों ने कहा - अरे भूकंप आया !

मैं बोली - ना, किसी का इशारा आया। 


धरती मां ने हमें ज़रा प्यार से हिलाया,

जैसे ज़मीर को सोते हुए से जगाया। 


शायद आज धरती माँ का दिल भर आया।

और हम सभी तक यह पैगाम पहुंचाया। 


इस पैगाम से हमें यह एहसास दिलाया - 

Monday, September 18, 2023

एनसीपीए के संयोग से लिटरेरी वारियर ग्रुप द्वारा नीलम सक्सेना चंद्रा की नवीनतम पुस्तक "मोह से बंधी मैं" का सस्वर पाठ

ऐसे होते हैं, जो ज़िंदगी भर के लिए  अपनी छाप छोड़ जाते हैं। मैं बात कर रही हूं ऐसी ही एक रोमांचक शाम की जिसके एक एक पल में साहित्य के अनेक रंगों का मिलाप था। दिल को छू जाने वाली कविताएं और मोहित कर दे ऐसा नृत्य था।यह उत्कृष्ट कार्यक्रम प्रतिष्ठित एनसीपीए में दिनांक ६ सितंबर को आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत नीलम सक्सेना चंद्रा द्वारा लिखी गई पुस्तक "मोह से बंधी मैं" के वाचन के साथ हुई।नीलम को

Wednesday, September 6, 2023

सावन की छवि : रंजीत कुमार साहू

नभ ने संदेश भेजा सागर को 

तृषा से धरती जल रही है  
जीवन की डोर ढीली हो रही है 
प्राणी की  सांस  मचल रही है 
सौगात भेजा है सागर ने आज 
उमड़ पड़ा है बादलों का झुंड 
फिर आकाश  चूमने लगा है 


गुनगुनाने लगे पहाड़ी झरने 
भीगने लगे है  सूखे पत्थर 
जीवन की आस चैन भरी  सांस 
देखे नयन  भटके जिधर 
फैलाया  धरती आँचल अपना  
बिखरा हरा रंग उस पर 
फिर मौसम  घूमने लगा है 

Wednesday, June 21, 2023

डाँ. अंजना अनिल की कुछ कविताएं

  


आनंद

अजब अनूठी... मीठी

सिहरन सा... वो दिन

निराला होता है

जब पंछी के कलरव सी

विरल अभिव्यक्ति

कलम की नोक पर

आ बैठती है...

सूरज के उगते प्रकाश संग

रंग-बिरंगी आस्थाओं की अल्पना

घर द्वार

सजा देती है!

लगता है... ग्राम परिवेश

मानस के आकाश को

अपनी सुरम्यता से

आच्छादित कर देता है...

Monday, April 10, 2023

रंजीत साहू की दो कवियाएँ


गुमसुम हुई शाम सुहानी 


फिर बहकने लगा  फागुन देखो,


टेसू के पेड़ों  से गुजर गया I


ढलती शाम की जलती किरणों में,


इश्क़ का हुनर  बिखर गया !



एक कश्मकश शुरू हुई  दिल में, 


भूलने और याद करने  में I


 फर्क सब कुछ मिटने  लगा है, 


मिट जाने  या ज़िन्दा रहने में  I

Saturday, March 4, 2023

डॉ. धर्मपाल साहिल की तीन कवियाएँ

धर्मपाल साहिल
पत्धर

शीशे के घर में रहने वाले, 

करते हैं बात पत्थर की.

पत्थर जब पूजा गया तो, 

बढ़ गई औकात पत्थर की...! 

वही मंदिर, वही मस्जिद

 और वही गुरुद्वारे में था, 

हर जगह नज़र आई, 

जात एक ही पत्थर की.....! 

शीशे का होकर रिश्ता, 

शीश महल जैसा था, 

हो गया चूर जब लगी, 

 उसे घात पत्थर की...! 

पत्थरों के शहर में , 

 पत्थर जैसे लोग मिले, 

 फलदार पेड़ों को मिली, 

Thursday, March 2, 2023

'शिखर'- शैलेंद्र कपिल

 (आज मेरी सेवानिवृत्ति का एक वर्ष पूरा हो गया है)


शिखर

परिवर्तन क्या है, बेहतरीन एहसास हो रहा है

ज़िन्दगी का हर  पड़ाव  प्रभावशाली रहा है,

अनुभवों को मैंने हर स्तर पर सांझा किया है

उम्मीद, उल्लास और उमंग से

जीने की मन में आज भी ललक जिंदा है।


जिंदगी को एक बात और कहनी है,

उम्मीद रखकर जीनी आगे बढ़ रही जिंदगानी है,

अपराध बोध से उठकर के हमें जीना है

Tuesday, February 28, 2023

भारतीय कविता आंदोलनों के जन्मदाता : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

(शैलेंद्र , प्रयागराज)

सूर्यकांत  त्रिपाठी निराला जी का आज 123वां जन्मदिन है ।आज ही अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस एवं बसंत ऋतु का दौर भी है।

हिंदी साहित्य के छायावाद के चार कवियों, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा के साथ सूर्यकांत जी प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने बंग्लाभाषी होते हुए भी हिंदी साहित्य की,और  गीत, कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध आदि विधाओं में  रचनाएं सृजित कर छायावाद व परवर्ती काव्य आन्दोलनों के साहित्यकारों का मार्ग दर्शन किया।

सूर्यकांत जी का जन्म रविवार के दिन बंगाल की महिषादल रियासत, मिदनापुर में हुआ। रविवार के दिन पैदा होने के कारण उनका नाम सूर्यकांत रखा

Monday, February 27, 2023

'फ़र्जी'

मैं जब भी उनकी दुकान पर जाता 

वे नामी बाबाओं के 

वीडियो देखते - सुनते हुए ही मिलते थे।

उनमें से कुछ बाबा आज ---- की हवा खा रहे हैं।

आज जब मैं उनकी दुकान पर पहुंचा 

तब भी वे कोई वीडियो ही देख रहे थे। 

मैने पूछा- कौन से बाबा को देख - सुन रहे हैं ?

वे बोले  - अरे नहीं, पिक्चर चल रही है। 

मैने पूछा - कौन सी ?

तो वे बोले  -  फर्जी।


(राजेन्द्र ओझा, रायपुर,  छत्तीसगढ़)





Thursday, November 24, 2022

हरेंद्र कैसे बनी 'फ्लोरेंस नाइटेंगल' पुरस्कार की हासिल


 "सेवा तां मेरे खून विच है जी" यह कहना है हरिंदर   कौर का जिन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने हाल ही में फ्लोरेंस नाइटेंगल राष्ट्रीय पुरस्कार से  नवाजा है। गवर्नमेंट मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल सेक्टर 16 में  नरसिग ऑफिसर के रूप में कार्यरत हरिंदर को उनकी श्लाघनीय सेवाओं के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।

पुरस्कृत होने पर  गदगद हरिंदर का कहना है  कि किसी की सेवाओं को इस तरह मान्यता दी जाए तो उसको और भी समर्पण भाव से सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। शेष लोग भी अच्छे काम के लिए प्रेरित होते हैं।

उनका कहना था कि वह सेवा के जज्बे को लेकर ही बड़ी-बड़ी हैं। उनके दादा पिता भाई व परिवार के अन्य लोग जन सेवा ही करते और कर रहे हैं । उनके अनुसार जब उन्होंने जी एन एम कोर्स पूरा किया तो पिताजी ने सिर पर हाथ रख कर कहा था पुत अपने जीवन को समाज सेवा में लगा दो। बडहेड़ी  बटेरला सेक्टर 41 चंडीगढ़  में जन्मी हरिंदर नेसे क्टर 21 के मॉडल स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद एमसीएम कॉलेज से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट राजेंद्र मेडिकल कॉलेज पटियाला से 1990 र्में जीएमएन का कोर्स किया। इसके बाद वही नियुक्त हो गई । वर्ष 2001 से सेक्टर 16 के सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं।

मानव सेवा का कार्य क्योंकि हरिंदर कौर ने शौक से अपनाया था इसीलिए उन्होंने नौकरी पूरी तन्मयता से करने का बीड़ा उठाया हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती कोरोना कॉल में आई । चंडीगढ़ का पहला कोरोना मरीज मनदीप उन्हीं के अस्पताल में आया था और उन्होंने बाकी टीम सदस्यों के साथ उसके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी ।

चंडीगढ़ की स्वास्थ्य व परिवार कल्याण निदेशक डॉक्टर अमनदीप कौर कंग  उनकी लगन देखते हुए हरिंदर कौर को कोविड- प्रभावित गर्भवती महिलाओं की सेवा के लिए मुझे गायनी यूनिट में ले आई । इसके लिए अस्पताल में विशेष प्रसूति कक्ष बनाने में भी हरिंदर कौर ने बढ़-चढ़कर योगदान किया।

हरिंदर कौर बताती हैं कि  अस्पताल में कोविड-19 रोगियों के लिए क्यूबिकल्स के निर्माण के दौरान उन्होंने लेबरके साथ मिलकर काम किया।

कोरोना जितना बड़ा चैलेंज था उतना ही उन्होंने खुद को इसके मरीजों के उपचार के लिए तैयार किया। कोविड-19 प्रभावित गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी व प्रसूति के बाद उनकी और नए जन्मे बच्चों की देखभाल के लिए उन्होंने इनके साथ अपने आपको भी पूरी तरह समर्पित कर दिया। ड्यूटी के समय का कोई ध्यान ना करते हुए उन्होंने दिन रात सेवा की। जब वह थकावट से गिर जाती तो उनके सहयोगी चिकित्सक उन्हें उठाते और वह फिर नए उत्साह से उपचार कार्य में लग जाती। इस दौरान डॉ रमनदीप कौर ,डॉ सुमन, डॉक्टर बरिंदरजीत कौर, डॉक्टर सपना, डॉ अपूर्वा, डॉक्टर गुन्चु और सिस्टर गुरमीत ने बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई। इस दौरान हरिंदर कौर को कई कई दिन अस्पताल में ही रहना पड़ता।

हरिंदर कौर को इस बीच परिवार का भी पूरा सहयोग मिला । थकी मांदी मोहाली में अपने घर पहुंचती तो सरकारी सेवा में कार्यरत पति और बेटे का पूरा साथ मिलता। यह लोग उनकी ड्यूटी को समझते   इसीलिए इसे निभाने में उनका पूरा साथ देते।

कोरोना रोगियों के उपचार में सेक्टर 16 का अस्पताल काफी मशहूर हो गया था । चंडीगढ़ के अतिरिक्त मोहाली पंचकूला और आसपास के लोग भी कोरोना उपचार के लिए इसी अस्पताल में भेजे जाने लगे। हरिंदर कौर के अनुसार इस दौरान कोविड-19 प्रभावित करीब ढाई सौ गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी इसी अस्पताल में करवाई गई । उनका कहना है कि उनकी ही टीम ने सामान्य प्रसूति के अलावा इन महिलाओं के सिजेरियन बी करवाए । प्रसूति के बाद मां और बच्चे की देखभाल भी पूरी निष्ठा के साथ की गई ।

हरिंदर कौर की अथक सेवा को देखते हुए पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने 26 जनवरी , 2020 को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुरस्कृत किया ।

राष्ट्रीय लक्ष्य कार्यक्रम के तहत जब मेटरनिटी केयर प्रोग्राम शुरू किया गया तो सेक्टर 16 अस्पताल की टीम की हरिंदर कौर मेंटर रही ।

इतनी सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति से पुरस्कार तो मिला ही साथ में अन्य संगठनों ने भी सम्मानित किया है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल और ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन भी उन्हें नवाज चुके हैं । नगर निगम  मोहाली, सेक्टर 41 बटेरला उनके पैतृक गांव के संगठन , सीनियर सिटीजन एसोसिएशन, मोहाली ने भी उन्हें सम्मानित किया है। सेक्टर 49 के गुरुद्वारा चरण  कंवल साहब और सेक्टर 16 अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्टाफ संगठनों ने भी उनका अभिनंदन किया है ।

 हरिंदर कौर का कहना है कि पुरस्कार प्राप्ति मेरे जीवन के गौरवपूर्ण क्षण है । मुझे रब से और क्या चाहिए। मेरे काम को मान्यता मिली है । अस्पताल के चिकित्सकों और मेरे साथियों का मुझ पर पूरा विश्वास है इसीलिए कोविड-19 के चुनौतीपूर्ण दौर में मुझे बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई और उत्साहित किया गया। राष्ट्रपति महोदय ने पुरस्कृत करने के समय मुझे कहा था कि रिटायरमेंट शब्द कभी जिंदगी में मत  लाना और ताउम्र सेवा करते रहना। यह बहुत बड़ी बात है मेरे लिए । मैं भी जिंदा जी महिलाओं के कल्याण और स्वास्थ्य पर ध्यान देती रहूंगी । "रब मैनू समरथा देवे।"


     अवतार सिंह भंवरा







 


दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

  गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...