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Wednesday, March 2, 2022

कविताएँ: आशा कुमारी

जीवंत सा जीवन 

पूछा जो मैंने समंदर से,

तेरी मौजौ का मकसद है क्या ?


पलटकर उसने कहा,

जीवन नया हो, मकसद नया हो, 

नयी उम्मीदें हो, नयी हो आशायें  |

बडी जीवंत सी हो, कुछ आकांक्षायें ।


गम हो या खुशी, ज़िन्दगी हो नयी,

दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल

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