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दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल
गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...
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परिचय: शिक्षा~ एम.ए.राज विज्ञान, व सी. लिब. जन्म~ 17 मार्च 1963 विधा ~ लघु कथा,व छांदसिक रचनाएँ । प्रकाशित कृतियाँ- 1.दर्द की परछाइयाँ (201...
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हम और तुम भले चाहें युद्ध न हों पर युद्ध होंगे और मरना किसे इस युद्ध में यकीनन हमको तुमको नेता आए,नेता गए दर्ज हुआ युद्ध इतिहास मे तो ...
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चार्ली चैपलिन की याद में, ------ सपनों में भी यथार्थ में भी, कारण से भी बिना किसी कारण भी मैं खुश रहना चाहता हूं, पैदल चलकर भी, एकेला चल...
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