अनुवाद: सुजाता
Saturday, April 23, 2022
अपनी चाय की चुस्की भरो धीरे_धीरे/ मज़े से : प्रोफ: ली तसु पेंग
कविताएँ : अरतिंदर संधू
कुदरत के रंगों का जलाल था
बराबरी थी,एकरसता थी
पेड़ थे,बूटियाँ थी
स्थान था हरेक वस्तु का
कुदरती रचना थी
नर और मादा होने की
बिलकुल उतने ही बराबर थे सब
जितना बराबर था होना उनका
मनुष्य का आना धरती पर
ले कर आना था
विशेष क़िस्म की समझदारी
समझदारी ने की कुछ बाँटें
निश्चित किये स्थान
सब जीव निर्जीव वस्तुओं के
बंट गया तथ्य होने रहने का
नर और मादा होने में
Wednesday, March 2, 2022
सन्तोष कुमार पोखरेल (नेपाल) : कविताएँ
संतोष कुमार पोखरेल नेपाल के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध बहुभाषी लेखक और कवि हैं। वह नेपाली, अंग्रेजी, हिंदी और रूसी में लिखते हैं। उनके पास कहानियों और निबंधों सहित हजारों कविताएँ हैं। उन्होंने अब तक छह किताबें लिखी और प्रकाशित की हैं। उनकी रचनाओं का अब तक 29 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। कवि पोखरेल को विश्व साहित्य में उनके साहित्यिक योगदान के लिए समय-समय पर प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। नेपाली कवि संतोष कुमार पोखरेल को एंटोन चेखव ऑटम 2020, क्रीमिया, रूस द्वारा 'विश्व कवि' की उपाधि से सम्मानित किया गया है। जनवरी 2022 में, कवि संतोष कुमार पोखरेल को यूक्रेन के साहित्यिक फाउंडेशन और 10 देशों के संगठनों द्वारा प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण कवि पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। फिर से, जनवरी 2022 में, उन्हें इंटरनेशनल सेंटर फॉर पोएट्री ट्रांसलेशन एंड रिसर्च एंड इंटरनेशनल पोएट्री (बहुभाषी), चीन के "जर्नल ऑफ रैंडिसन" द्वारा "द इंटरनेशनल बेस्ट पोएट" की उपाधि से सम्मानित किया गया।
विश्व कवि संतोष कुमार पोखरेल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मंच के प्रमुख हैं। अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मंच अपना स्वयं का फेसबुक समूह चलाता है और विश्व कविता संग्रह प्रकाशित करता है।
उन्होंने पीपुल्स फ्रेंडशिप यूनिवर्सिटी, मॉस्को से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है। कवि पोखरेल, जिनके पास त्रिभुवन विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री है, वे उसी त्रिभुवन विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। pokharel.santosh@gmail.com
सेज-ए-जख्म सजाऊँ
सेज-ए-जख्म सजाऊँ
ऊन की गजलें गाऊँ
नींद कहाँ?यादों में खोयी
खुद को ही भूल जाऊँ।
प्रसंना कुमार : कविताएँ:
मैं आपकी चुप्पी सुनूंगा
आपको उसमें महसूस और समझ
आपसे कभी दूर नहीं जाएगा
लेकिन मेरे लिए अपना सब कुछ त्याग दो
और अपने दर्द और दुर्दशा को साझा करें
तुम्हारे बिना शून्य में मेरी मदद करो
जितना अधिक हम मिलते हैं, मैं उतना ही मजबूत हूं
आप माइनस रहने का सपना नहीं देख सकते
कविताएँ: स्मृति रंजन महान्ति
स्मृति रंजन महान्ति, श्री राज किशोर महान्ति और शान्तिलता महान्ति के सुपुत्र, 1/1/1963 को ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के पदमपुर में जन्मे, एक बहुभाषी कवि, निबंधकार और लेखक हैं जो 'पेंटासी बी वर्ल्ड फ्रेंडशिप पोएट्री' के उल्लेखनीय कवियों में सम्मिलित हैं। उनकी रचनाओं में निबंध, लघु कथाएँ, कविताएँ और उपन्यास शामिल हैं, जो अखबारों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं, जरनल और संकलनों में छप चुकी हैं। ओडिशा सरकार के वित्त विभाग में अफसर के तौर पर कार्यरत, वो अधिकांशतः जीवन, उसकी सुंदरता और गूढ़ता पर लिखते हैं, जो व्यापक रूप से प्रसंशित हैं।
और एक बार
सारी स्मृतियां विस्मृत हो जाने के बाद
तुम रहती हो पास पास
स्मृति की प्रचुरता बनकर...
सारे सूर्यों के बुझ जाने के बाद
तुम रहती हो पास पास
हज़ारों मशालें बनकर...
सारे प्राप्तियों के निःशेष होने के बाद
डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की कविताएँ
प्रकाशन/संपादन-
बिन्दु में सिन्धु, उन पलों में, शब्द-शब्द क्षणबोध, आर-पार, कई फूल - कई रंग, डॉ. मिथिलेश दीक्षित का क्षणिका-साहित्य, फतेहपुर जनपद के हाइकुकार, डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के सौ शेर, नयी सदी के दोहे, क्षणिका काव्य के हस्ताक्षर, दि अण्डरलाइन क्षणिका विशेषांक, अचिन्त साहित्य दीपावली क्षणिका विशेषांक तथा अन्वेषी के कई वार्षिकांक।
विशेष-
* अनेक यूरोपीय एवं एशियाई भाषाओं यथा ग्रीक, फ्रेंच, जर्मन, चाइनीज, अज़रबैजानी, पुर्तगीज, सर्बियन, क्रोशियन, अरेबिक आदि भाषाओं में कविताओं का अनुवाद।
* टीवी प्रोग्राम यू एण्ड लिटरेचर टूडे, नाइजीरिया द्वारा लिटरेरी आइकॉन घोषित (दिसम्बर 2018)।
* विभिन्न पत्रिकाओं यथा अन्वेषी, गुफ़्तगू, अनुनाद, तख़्तोताज, मौसम, पुरवाई, शब्द गंगा, अरण्य वाणी आदि के लिए पूर्व/वर्तमान में संपादन, सहसंपादन व कार्यकारी संपादन।* हिन्दी और अंग्रेज़ी की देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं-वेबपत्रिकाओं और विविध संकलनों में विभिन्न विधाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
* हिन्दी और अंग्रेज़ी की शताधिक पुस्तकों के लिये भूमिका/विमर्श/समीक्षा/आलोचना आदि प्रकाशित।
* द डियर जाॅन शो, वारिंगटन, इंग्लैंड में कविता प्रसारण।
* अनेक साहित्यिक/सांस्कृतिक संस्थाओं में उत्तरदायी पदों पर आसीन।
* एसोसियेट एडिटर- "द वायस ऑफ क्रियेटिव रिसर्च", ई-जर्नल।
* क्षणिकाकार एवं माइक्रोपोएट्री कॉस्मॉस का संपादन।
* गुफ़्तगू तथा अमृतांजलि आदि पत्रिकाओं में वर्तमान में परामर्शदाता की भूमिका में।
* लघुकथा 'छंगू भाई' पर इसी नाम से लघु फ़िल्म का निर्माण।
* बेकल उत्साही सम्मान 2017, साहिर लुधियानवी सम्मान 2021, डॉ. गणेश दत्त सारस्वत सम्मान 2019, काव्यांजलि एवार्ड 2012 तथा सृजनशीलता सम्मान 2017 सहित कुछ अन्य सम्मान।
* विभिन्न सामयिक साहित्यिक मुद्दों पर देश के अनेक शीर्ष साहित्यकारों/विद्वानों के साथ परिचर्चाएँ/चौपालों का संयोजन/प्रकाशन।
* साहित्य एवं संस्कृति से सम्बन्धित विभिन्न नामचीन हस्तियों के साक्षात्कार।
* विभिन्न प्लेटफॉर्मों के माध्यम से हिन्दी एवं अंग्रेज़ी माइक्रोपोयट्री पर विशेष कार्य।
(अध्यक्ष-अन्वेषी संस्था)
विश्वास करो
मैं
असहज हो गया था
उस दिन
तुम्हारी आँखों में आँसू देख कर
सम्भवतः
पहली बार मुझे
लगा था ऐसा
कि तुम्हारे हृदय में
कविताएँ: आशा कुमारी
जीवंत सा जीवन
पूछा जो मैंने समंदर से,तेरी मौजौ का मकसद है क्या ?
पलटकर उसने कहा,
जीवन नया हो, मकसद नया हो,
नयी उम्मीदें हो, नयी हो आशायें |
बडी जीवंत सी हो, कुछ आकांक्षायें ।
गम हो या खुशी, ज़िन्दगी हो नयी,
Saturday, February 12, 2022
देव या देवारि? (कहानी) : -डॉ निधि अग्रवाल
(गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में जन्म। वर्तमान में चिकित्सक के रूप में झांसी (उत्तर प्रदेश) कार्यरत। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी के छतरपुर (मध्य प्रदेश) केंद्र तथा स्थानीय ऍफ एम गोल्ड के कार्यक्रमों में रचनाओं का निरन्तर पाठ।कहानी संग्रहरू श्अपेक्षाओं के बियाबानश् काव्य संग्रहरू श्अनुरणनश् प्रकाशनाधीन)
ताजमहल को देखते सैलानी उसके सौंदर्य को अभिभूत निहारते थे। हाथों में लाल चूड़ा पहने एक लड़की ने लड़के के सीने पर सिर रखते हुए कहा - मेरे मरने के बाद तुम भी मुझे यूँ ही जिंदा रखना। बात खत्म होने से पहले ही लड़के ने उसके कोमल अधरों पर अपनी तर्जनी रख दी।।वहीं कुछ दूरी पर कुछ अन्य सैलानी मजदूरों के कटे हाथ और बेगमों की गिनती में उलझे थे। जया की सूनी आँखे माही और परी की तस्वीरें लेते मानस पर टिकी थी। मैं उसके मनोभाव समझ सकती थी।
“देख जया, मैं भी डॉक्टर हूं। तू समझ कि जब साथ काम करते हैं तो आपस में कुछ आत्मीयता स्थापित हो जाती है। जैसे निर्देशक और अभिनेत्री... वैसे ही एक सर्जन और एनेस्थेटिस्ट! इनमें भी साथ काम करते-करते एक सामंजस्य... एक लगाव उत्पन्न हो जाता है...” मैंने उसका हाथ थामते हुए कहा।
“इतनी अधिक आत्मीयता कि माही आपत्तिजनक तस्वीरें मानस को भेज रही है?” जया ने रुंधे गले से कहा।
मैंने आश्चर्य से उसे देखा। एक चुप्पी हम दोनों के अधरों से होती हुई दबे पाँव पेड़ों पर चढ़ी और निरभ्र आकाश तक फैल गई।
वह दुप्पटे से आँखें पोंछ रही थी। यह पिकनिक जया का मन बहलाने के लिए प्लान की गई थी लेकिन माही की उपस्थिति ने उसे दुख ही अधिक दे दिया था।
कविताएँ: पंखुरी सिन्हा
हामिद कारज़ाई के देश का चुनाव
ख़बरों की विभीषिका इस बीच
बहुत ज़्यादा रही
काफी कँपाया ख़बरों ने
कुछ आदत भी डाल दी
और कविता दूर रही
इस भयानक आक्रांत समय से
बहुत बौद्धिक रही कविता
जबकि दोनों को पढ़ने का वक़्त
लगभग एक रहा
लेकिन पढ़े लिखे अक्षरों के बने
सब कुछ के अचानक बंद होने का भी वक़्त रहा
कम से कम एक दिन
जो केवल कहे सोचने को
हिंसा के कारणों पर
कि इतनी संभ्रांत हो हिंसा
कि शोध का विषय बन जाए
हमारे अपने अफ़ग़ानिस्तान में
काबुली वालों के देश में
अब्दुमोमिनोव अब्दुल्लाह (उज़्बेकिस्तान) की कहानी: समय के चोर:
मेरा नाम डोनियोर है। मेरा पड़ोसी अब्दुल्ला और मैं घनिष्ठ मित्र बन गए हैं। एक दिन हमें मौज-मस्ती करने का कोई तरीका नहीं मिल रहा था। हमारा कोई लक्ष्य नहीं था। हमें नहीं पता था कि क्या करना है। जब हम लकड़ी के टुकड़े से कुछ बना रहे थे तो अचानक मेरे पिता की नींद खुल गई। उसकी आँखें आधी खुली थीं जब उन्होंने कहा:
"अरे, समय के चोर! क्या आप अपना समय बर्बाद कर रहे हैं?"
मुझे अपने पिता के "समय चोरों" का मतलब बिल्कुल भी समझ नहीं आया। मैं पूछना चाहता था, लेकिन वह सो गये।
मेरे दोस्त अब्दुल्ला ने भी पूछा "क्या हम चोर हैं?"
दिन का उजाला हुआ तो वह अपने घर चला गया। मैं भी थक कर सो गया। लेकिन मुझे याद आया कि मुझे स्कूल जाने में देर हो गई थी, इसलिए मैंने जल्दी से अपना चेहरा धोया और जल्दी में चाय पी ली। मुझे याद नहीं है कि मैंने क्या खाया.. मैंने सोचा कि मुझे स्कूल के लिए देर हो जाएगी, लेकिन कक्षा अभी तक शुरू नहीं हुई थी। मेरे कक्षा में पहुंचते ही शिक्षिका अंदर आ गई। हम सभी ने शिक्षिका का सम्मानपूर्वक अभिवादन किया । उन्होंने ने हमें सम्बोधित करते हुए कहा -
"मेरे प्यारे छात्रों! मैं आपको देखकर बहुत खुश हूं। मेरी खुशी असीम है।"
जैसे ही हमारी शिक्षिका हमें विषय समझा रही थी, मेरे एक सहपाठी ने आकर कहा, "शिक्षिका, मुझे खेद है कि मुझे आज देर हो गई।"
"डोनियोर, अब और देर मत करो।, शिक्षिका ने कहा। "इस बार मैं तुम्हें माफ कर दूंगी, लेकिन अगली बार मैं तुम्हें सजा दूंगी।"
कवियाएँ :- अदिती राणा जम्बाल
मजदूर
आसान नहीं है मजदूर होना
फुटपाथ पर बोरियां ओढ कर सोना।
पत्थरों के महल बनाना
पर खुद का सर ढकने के लिए छत के लिए तरसना ।
लोगों के खाबों को पूरा करने बाला रचयिता बनना
मगर खुद की दो वक़्त की रोटी के लिए मोहताज होना।
हर चीज में अपना पसीना लगाना
फिर भी बिन पैसे बिन रोटी के रह जाना।
पेट की आग के लिए गांव से जाना
सुजाता की दो कविताएँ
वृक्ष का रोमांच
मां चली गई तुम
पर जाते जाते
कई रिश्तों, रस्मों, रहस्यों से
पर्दे उठा गई
तुम्हारे जाने भर की देर थी
उम्र की कितनी सीढियां चढ़ गई मैं
_तैरना था संबंधों के ताल मेंजलजीवों की कचोट से बचते हुए
चलना था सड़क के बीचों बीच
खुद को बचाते हुए
असीम आकाश में उड़ना था
Wednesday, October 6, 2021
शोषिआत गुस्तामोव की कुछ कवियाएँ
Saturday, September 18, 2021
शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' (भीलवाड़ा ,राज.) की कुछ कविताएँ
परिचय:
शिक्षा~ एम.ए.राज विज्ञान, व सी. लिब. जन्म~ 17 मार्च 1963 विधा ~ लघु कथा,व छांदसिक रचनाएँ ।प्रकाशित कृतियाँ-
1.दर्द की परछाइयाँ (2017),
2. "बाकी रहे निशान" दोहा संग्रह( 2019) ,
3."काँच के रिश्ते"दोहा संग्रह(2020),
4."भावों की उर्मियाँ" कुंडलियाँ संग्रह (2021)
व अनेक साझा संग्रह
प्रकाश्य:-घनाक्षरी,गीत, कविता,लघुकथा व एकांकी संग्रह।
सम्मान व अलंकरण - हिंदी दिवस पर जिला साहित्यकार परिषद भीलवाड़ा द्वारा "साहित्य सुधाकर"-2018
विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा~ 'विद्यावाचस्पति' सम्मान-2018 में
द्वारकेश साहित्य परिषद कांकरोली द्वारा सम्मानित- 2019, काव्यांचल ग्रुप- 'छंद-रथी'-2019, व फरवरी 2020 में दोहा शिरोमणि सम्मान व अन्य कई सम्मान।
Shakuntalaagrwal3@gmail.com
आस घटी नहीं
मैं तुम्हें प्यार करती रही,
पल-पल तुम्हें पाने की
चाहत में डूबती रही,
पर तुमतो भोगते रहे जिस्म को,
मैं रूह से रूह के मिलन की आस में,
क्षण -क्षण मरती रही।
तुम अपने अहम में मगरूर रहे,
मैं त्याग की मूरत बनी रही,
तुम्हें कभी तो होगा अहसास,
हर क्षण मेरे मन में ये आस पलती रही
तुम,बेलगाम -घोड़े से विचरण
करते रहे।
मै खूँटे से बंधी रही
कभी तो तुम्हें मेरे समर्पण का संज्ञान होगा,
Saturday, September 4, 2021
दो कविताएं : द विनेसेंटं माईलज
email:
smilahgarcia@gmail.com
दिन में 21 सेब
मैं जब पिछली तरफ झाँकती हूँ
कि पिछले कुछ हफ्ते
कैसे फिजूल और वीरान रहे हैं
तो मैं अपने मन अंदर
उम्र भर के साथ का मंत्र दुहराती हूँ-
‘‘प्यार करना और प्यार लेना’’
मैं इसीलिए यहाँ थी।
अब परवाह नहीं
Saturday, August 28, 2021
नेपाली कवि सन्देश की कुछ कविताएं
सन्देश घिमिरे नेपाल के एक लेखक, कवि, संपादक और अनुवादक हैं। एक लेखक और लेखक के रूप में, उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों के लिए लेख लिखे हैं, जिनमें सृजन पैनिकल (भारत), होमो यूनिवर्सलिस पत्रिका (ग्रीस), साहित्यिक पोर्टल (बाल्कन), सिल्क रोड इंटरनेशनल पोएट्री फेस्टिवल (चीन), एटीयूनिस पत्रिका (अल्बानिया), पोएट्रीज़ाइन शामिल हैं। पत्रिका, डैश पत्रिका, एनहेदुआना का साहित्यिक उद्यान और द पोएट पत्रिका (इंग्लैंड)। उनकी साहित्यिक कृतियों का कई भाषाओं में अनुवाद और प्रकाशन हो चुका है। वह "पीस एंड हार्मनी", "द यूनिवर्स", " स्काउटर्स मेमोयर" आदि किताबों के लेखक हैं। उन्होंने चितवन सेंट्रल लियो एंड लायंस क्लब, इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटर ऑफ साइंसफोरम, इंटरनेशनल के चार्टर्ड सदस्य के रूप में काम किया है। सृजनोत्सव के समन्वयक और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के समन्वयक। वह ARTDO इंटरनेशनल के आजीवन सदस्य हैं। वह वर्तमान में मदर टेरेसा इंटरनेशनल फाउंडेशन (MTIF) के राष्ट्रीय मुख्य सचिव, ब्रांड एंबेसडर और इकरा फाउंडेशन के नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कालिका स्कूल इंटरनेशनल एडवाइजरी बोर्ड (KSIAB) के आधिकारिक संयोजक हैं।
Saturday, August 21, 2021
ईवा लिनोय की तीन अनुवादित कवियाएँ
ईवा लीनोय का जन्म ग्रीस के शहर जिलोकास्त्रो में 1973 को हुआ। 2002 में उसने एक फ्रेंच अख़बार 'ला लिब्रे जर्नल' में पत्तरकार के तौर पर काम शुरू किया। उसके बाद उसने ऐथनज़ में एक रेडियो प्रोड्यूसर की नौकरी शुरू की। आजकल वह सायप्रस में एक पत्रिका की बाल पन्नो का संपादन कर रही हैं।
ईवा लिनोय यूनेस्को लोगोस और 'पेनहेलनिक राइटर असोसिएशन' की मेम्बर भी हैं। उसकी किताबें सायप्रस सरकार द्वारा स्कूल सिलेबस में शामिल की गई हैं। यूरोप की कथाओं पर उसका काम महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध है।
तुम्हारे आतित्व से पहले
तुम मेरी आत्मा में रहते हो
इससे पहले की तुम कुछ कहो
समझ लेती हूँ तुम्हारे शब्द
बहुत वर्ष जिया है सूनापन
सितारों को देख कामना करना
और आशाएँ बनाई रखना
तुम्हारे आने से पहले
जान लेती हूँ तुम्हारी सुगन्ध
और इससे पहले की तुम कुछ कहो
सुन लेती हूँ तुम्हारी आत्मा की आवाज़
उड़ते पक्षियों को देखो
और चाहना करो
मैं एक घेरा बनाती हूँ
और उसमें देखती हूँ
तुमको और अपनेआप को
Saturday, January 30, 2021
अशोक कुमार की दो कविताएँ
अशोक कुमार आधुनिक अंग्रेजी एवम हिन्दी के विश्वविख्यात कवि है| इनका जन्म सन 1977 ई.मे टीकरी जिला बागपत मे हुआ था| इन्हे "शान्ति कवि" के रूप मे भी जाना जाता है | इन्हे इनकी कविताओ के लिए राष्ट्रय एवम विश्व- स्तर के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है| सम्मत2020 मे इन्हे विश्व शान्ति अभियान के लिए नाईजिरिया एवम मोरोक्को ने पी .एच.डी की मानद् उपाधि से भी नवाजा है |इनकी कविताओ का विश्व की विभिन्न भाषाओ मे जैसे स्पेनिश ,यूनानी ,इटेलियन ,हिबरु आदि मे किया जा चुका है|
मैं अमर हूँ !
एक सुंदर पक्षी की तरह
अनंत आकाश में उड़ता हूँ
जितनी अधिक मैं इच्छा करता हूं उतनी
जिसके पास ज्वाला है कमाल है,
मैं वैसा ही हूँ,
जैसा सूरज चमकता है
सब कुछ उसकी रोशनी में देखता हूँ
मैं पूरे परिवार को प्यार करता हूँ
और उनके साथ खुश हूँ
सभी की सराहना करता हूँ
Sunday, February 3, 2019
पतझड़ के दरख्तों के साथ एक दिन- जतिंदर औलख
Monday, May 14, 2018
दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल
गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...
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हम और तुम भले चाहें युद्ध न हों पर युद्ध होंगे और मरना किसे इस युद्ध में यकीनन हमको तुमको नेता आए,नेता गए दर्ज हुआ युद्ध इतिहास मे तो ...
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चार्ली चैपलिन की याद में, ------ सपनों में भी यथार्थ में भी, कारण से भी बिना किसी कारण भी मैं खुश रहना चाहता हूं, पैदल चलकर भी, एकेला चल...
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चन्द्रेखा ढडवाल जी की काव्य पुस्तक 'ज़रूरत भर सुविधा' मु झे अमृतसर में रह रही हिमाचल मूल की कवित्री सुजाता जी से प्राप्त हुई। यह पुस...






