Wednesday, October 6, 2021
शोषिआत गुस्तामोव की कुछ कवियाएँ
Saturday, September 18, 2021
शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' (भीलवाड़ा ,राज.) की कुछ कविताएँ
परिचय:
शिक्षा~ एम.ए.राज विज्ञान, व सी. लिब. जन्म~ 17 मार्च 1963 विधा ~ लघु कथा,व छांदसिक रचनाएँ ।प्रकाशित कृतियाँ-
1.दर्द की परछाइयाँ (2017),
2. "बाकी रहे निशान" दोहा संग्रह( 2019) ,
3."काँच के रिश्ते"दोहा संग्रह(2020),
4."भावों की उर्मियाँ" कुंडलियाँ संग्रह (2021)
व अनेक साझा संग्रह
प्रकाश्य:-घनाक्षरी,गीत, कविता,लघुकथा व एकांकी संग्रह।
सम्मान व अलंकरण - हिंदी दिवस पर जिला साहित्यकार परिषद भीलवाड़ा द्वारा "साहित्य सुधाकर"-2018
विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा~ 'विद्यावाचस्पति' सम्मान-2018 में
द्वारकेश साहित्य परिषद कांकरोली द्वारा सम्मानित- 2019, काव्यांचल ग्रुप- 'छंद-रथी'-2019, व फरवरी 2020 में दोहा शिरोमणि सम्मान व अन्य कई सम्मान।
Shakuntalaagrwal3@gmail.com
आस घटी नहीं
मैं तुम्हें प्यार करती रही,
पल-पल तुम्हें पाने की
चाहत में डूबती रही,
पर तुमतो भोगते रहे जिस्म को,
मैं रूह से रूह के मिलन की आस में,
क्षण -क्षण मरती रही।
तुम अपने अहम में मगरूर रहे,
मैं त्याग की मूरत बनी रही,
तुम्हें कभी तो होगा अहसास,
हर क्षण मेरे मन में ये आस पलती रही
तुम,बेलगाम -घोड़े से विचरण
करते रहे।
मै खूँटे से बंधी रही
कभी तो तुम्हें मेरे समर्पण का संज्ञान होगा,
Saturday, September 4, 2021
दो कविताएं : द विनेसेंटं माईलज
email:
smilahgarcia@gmail.com
दिन में 21 सेब
मैं जब पिछली तरफ झाँकती हूँ
कि पिछले कुछ हफ्ते
कैसे फिजूल और वीरान रहे हैं
तो मैं अपने मन अंदर
उम्र भर के साथ का मंत्र दुहराती हूँ-
‘‘प्यार करना और प्यार लेना’’
मैं इसीलिए यहाँ थी।
अब परवाह नहीं
Saturday, August 28, 2021
नेपाली कवि सन्देश की कुछ कविताएं
सन्देश घिमिरे नेपाल के एक लेखक, कवि, संपादक और अनुवादक हैं। एक लेखक और लेखक के रूप में, उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों के लिए लेख लिखे हैं, जिनमें सृजन पैनिकल (भारत), होमो यूनिवर्सलिस पत्रिका (ग्रीस), साहित्यिक पोर्टल (बाल्कन), सिल्क रोड इंटरनेशनल पोएट्री फेस्टिवल (चीन), एटीयूनिस पत्रिका (अल्बानिया), पोएट्रीज़ाइन शामिल हैं। पत्रिका, डैश पत्रिका, एनहेदुआना का साहित्यिक उद्यान और द पोएट पत्रिका (इंग्लैंड)। उनकी साहित्यिक कृतियों का कई भाषाओं में अनुवाद और प्रकाशन हो चुका है। वह "पीस एंड हार्मनी", "द यूनिवर्स", " स्काउटर्स मेमोयर" आदि किताबों के लेखक हैं। उन्होंने चितवन सेंट्रल लियो एंड लायंस क्लब, इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटर ऑफ साइंसफोरम, इंटरनेशनल के चार्टर्ड सदस्य के रूप में काम किया है। सृजनोत्सव के समन्वयक और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के समन्वयक। वह ARTDO इंटरनेशनल के आजीवन सदस्य हैं। वह वर्तमान में मदर टेरेसा इंटरनेशनल फाउंडेशन (MTIF) के राष्ट्रीय मुख्य सचिव, ब्रांड एंबेसडर और इकरा फाउंडेशन के नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कालिका स्कूल इंटरनेशनल एडवाइजरी बोर्ड (KSIAB) के आधिकारिक संयोजक हैं।
Saturday, August 21, 2021
ईवा लिनोय की तीन अनुवादित कवियाएँ
ईवा लीनोय का जन्म ग्रीस के शहर जिलोकास्त्रो में 1973 को हुआ। 2002 में उसने एक फ्रेंच अख़बार 'ला लिब्रे जर्नल' में पत्तरकार के तौर पर काम शुरू किया। उसके बाद उसने ऐथनज़ में एक रेडियो प्रोड्यूसर की नौकरी शुरू की। आजकल वह सायप्रस में एक पत्रिका की बाल पन्नो का संपादन कर रही हैं।
ईवा लिनोय यूनेस्को लोगोस और 'पेनहेलनिक राइटर असोसिएशन' की मेम्बर भी हैं। उसकी किताबें सायप्रस सरकार द्वारा स्कूल सिलेबस में शामिल की गई हैं। यूरोप की कथाओं पर उसका काम महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध है।
तुम्हारे आतित्व से पहले
तुम मेरी आत्मा में रहते हो
इससे पहले की तुम कुछ कहो
समझ लेती हूँ तुम्हारे शब्द
बहुत वर्ष जिया है सूनापन
सितारों को देख कामना करना
और आशाएँ बनाई रखना
तुम्हारे आने से पहले
जान लेती हूँ तुम्हारी सुगन्ध
और इससे पहले की तुम कुछ कहो
सुन लेती हूँ तुम्हारी आत्मा की आवाज़
उड़ते पक्षियों को देखो
और चाहना करो
मैं एक घेरा बनाती हूँ
और उसमें देखती हूँ
तुमको और अपनेआप को
Saturday, January 30, 2021
अशोक कुमार की दो कविताएँ
अशोक कुमार आधुनिक अंग्रेजी एवम हिन्दी के विश्वविख्यात कवि है| इनका जन्म सन 1977 ई.मे टीकरी जिला बागपत मे हुआ था| इन्हे "शान्ति कवि" के रूप मे भी जाना जाता है | इन्हे इनकी कविताओ के लिए राष्ट्रय एवम विश्व- स्तर के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है| सम्मत2020 मे इन्हे विश्व शान्ति अभियान के लिए नाईजिरिया एवम मोरोक्को ने पी .एच.डी की मानद् उपाधि से भी नवाजा है |इनकी कविताओ का विश्व की विभिन्न भाषाओ मे जैसे स्पेनिश ,यूनानी ,इटेलियन ,हिबरु आदि मे किया जा चुका है|
मैं अमर हूँ !
एक सुंदर पक्षी की तरह
अनंत आकाश में उड़ता हूँ
जितनी अधिक मैं इच्छा करता हूं उतनी
जिसके पास ज्वाला है कमाल है,
मैं वैसा ही हूँ,
जैसा सूरज चमकता है
सब कुछ उसकी रोशनी में देखता हूँ
मैं पूरे परिवार को प्यार करता हूँ
और उनके साथ खुश हूँ
सभी की सराहना करता हूँ
Sunday, February 3, 2019
पतझड़ के दरख्तों के साथ एक दिन- जतिंदर औलख
Monday, May 14, 2018
Sunday, March 4, 2018
दो कविताएं : द विनेसेंटं माईलज (अनुवादः देव भारद्वाज)
दिन में 21 सेब
मैं जब पिछली तरफ झाँकती हूँ
कि पिछले कुछ हफ्ते
कैसे फिजूल और वीरान रहे हैं
तो मैं अपने मन अंदर
उम्र भर के साथ का मंत्र दुहराती हूँ-
‘‘प्यार करना और प्यार लेना’’
मैं इसीलिए यहाँ थी।
दो गज़लें- डॉ: आरती कुमारी,
![]() |
| डॉ० आरती कुमारी |
दास्तां इश्क मोहब्बत की सुनाने वाले
जाने किस देश गए पिछले जमाने वाले।।
कस्मों वादों की रेवायत तो अभी है लेकिन
अब कहाँ लोग हैं, वो वादे निभाने वाले।।
जिंदगी क्या है किसी ने नहीं समझा लेकिन
मौत आती है तो रोते हैं जमाने वाले।।
अब तो पलकों पे भी जलते नहीं अश्कों के चिराग
गर कभी जल भी गए, आए बुझाने वाले।।
Saturday, February 24, 2018
‘चुटकी भर मुस्कान’
जीवन जहाँ प्रकृति से मिला एक अतुलनीय, अद्भूत, विलक्षण, वैभवशाली, महान् मायावी वरदान है, वहीं यह मानव के लिए कठिनाइयों, चुनौतियों, अप्रत्यासित घटनाओं के वशीभूत मिलन व बिछुड़न का स्वर भी पग-पग पर मुखर करता है। जीवन है तो ख़ुशी है, ग़म है। प्यार, मनुहार, टकराव, उपहास, उपालम्ब, यश, अपयश मनुष्य के दैनंदिन व्यवहार को तय करते हैं, उसके सामर्थ्य व वजूद को चुनौती देते रहते हैं। इन सभी झंझावतों के बीच यदि चुटकी भर मुस्कान अधरों पर किसी न किसी रूप में खिलती रहे तो इसमें कोई सन्देह नहीं रह जाता है कि जीवन सहज, सरस व सरल भाव-प्रवृति की ओर उन्मुख रहता है। कवयित्री रश्मि खरबन्दा की काव्य-कृति ‘चुटकी भर मुस्कान’ कुछ इसी तरह की अभिव्यक्ति लिए हुए है।
समीक्ष्य काव्य-संग्रह में 73 कविताओं का समावेश है, जो कि मानव-जीवन के विभिन्न आयामों, झंझावतों व उबड़-खाबड़, पथरीले तो गरम रेतीले रास्तों के यथार्थबोध से अवगत कराती हैं तो जीवन के उज्जवल पक्ष प्यार, हास-परिहास, स्नेह, वात्सल्य, रिश्तों की माधुर्यता का सोपान भी कराती हैं। काव्य-कृति का शीर्षक मनमोहक वजीवन के प्रति सकारात्मक सन्देश देता है। शीर्षक में निहित भाव, विषम परिस्थितियों के बीच चुटकी भर मुस्कान बनाए रखना, कवयित्री के काव्य-स्वभाव के साथ-साथ उसके व्यवहारिक पक्ष को भी उजागर करता है।
अब शीर्षक की बात चल निकली है तो क्यों न इस समीक्ष्य कृति की शीर्षक कविता पर आया जाए। पृष्ठ 26 पर
सम्पादकीय- जतिंदर औलख
आज सुख-सहूलियत के सारे साधन मौजूद हैं फिर भी हर मन किसी ना किसी कारणवश बैचौन है। हर इंसान ज्यादा से ज्यादा हासिल करना चाहता है। हर जाति, धर्म और वर्ग अपने-अपने लिए और ज्यादा सुविधाएं हासिल करने में जुटे है। इंसान बैचौन है तो समाज बिखराव की और बढ़ रहा है ऐसे में मानवीय सोच में क्रांतिकारी बदलाव की जरूरत है जो साहित्य ही ला सकता है। मात्र यही एक राह है जो सृष्टि और इंसान के बीच की बढ़ती दूरी को कम कर सकता है।
पंजाबी में हमने दस वर्ष पहले ‘मेघला’ का आरम्भ किआ जो आज पंजाबी साहित्य में एक अलग मुकाम विकसित कर चुका है। हम खुश हैं के आज यही प्रयास हिंदी में शुरू करने की प्रसन्ता ले रहे हैं जिसमे हमारी कोशिश होगी के मयारी रचनाएँ प्रकाशित कर पाठकों को साहित्य के साथ जोड़ा जाए।
यह पहला अंक है, जो भी हमसे हो पाया स्वीकार कीजिएगा। देश भर से दोस्तों- लेखकों का भरपूर सहयोग
जिज्ञायासा खरबंदा,
जिज्ञायासा खरबंदा,
कविता
अध्यापक
वह बहुत समझदार है।
उसे किताबें पढ़ना नहीं आता
पर,
वह लागों को,
अच्छे से पढ़ लेता है;
एक वक्त ही रहा उसका
बिन-माँगा, अनचाहा
अध्यापक!
ऐतिहासिक मंथन
म्ेरे देश के भविष्य
और मेरे देश के इतिहास
कविताएं -बिरेन्द्र शर्मा ’वीर’
बिरेन्द्र शर्मा ’वीर’, पिता श्री सुरेश चन्द मोद्गिल, माता श्रीमती कृष्णा देवी, जन्म 9 फरवरी 1974, शिक्षा विश्वविद्यालय :स्नातकोŸार (कला) हिमाचल प्रदेश, संप्रतिः मैनेज़र बिज़नेस डवेलपमेंट, अवार्ड : हरफनमौला स्वयंसेवी 1997 एवं बैस्ट बल्ड डोनर 1998 (हि.प्र)
पहाड़ बोलते हैं
कौन कहता है
पहाड़ नहीं बोलते,
बोलते हैं पहाड़
और
बुलंद आवाज़ में बोलते हैं !
सर-सर करती हवा
उनसे बातें करती है
झर-झर झरता झरना
उनको गीत सुनाता है
कल-कल करती नदियाँ
उनके किनारे पनपी
कई सभ्यताओं का इतिहास बताती हैं
और
दो कविताएं : शैलेंद्र क र विमल
गुज़रा हुआ ज़माना गुज़रा वक्त चलचित्र है, जैसे संघर्ष अनवरत है, यादों के सताने से हर कोई कोई सकूं मिलता पवित्र सा है, सामान्य वक्त हर ...
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हम और तुम भले चाहें युद्ध न हों पर युद्ध होंगे और मरना किसे इस युद्ध में यकीनन हमको तुमको नेता आए,नेता गए दर्ज हुआ युद्ध इतिहास मे तो ...
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चार्ली चैपलिन की याद में, ------ सपनों में भी यथार्थ में भी, कारण से भी बिना किसी कारण भी मैं खुश रहना चाहता हूं, पैदल चलकर भी, एकेला चल...
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चन्द्रेखा ढडवाल जी की काव्य पुस्तक 'ज़रूरत भर सुविधा' मु झे अमृतसर में रह रही हिमाचल मूल की कवित्री सुजाता जी से प्राप्त हुई। यह पुस...











