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Sunday, February 3, 2019
पतझड़ के दरख्तों के साथ एक दिन- जतिंदर औलख
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सर्दी का मौसम आपने चरम पर है। पतझड़ बीत रही है। पतझड़ में ना जाने क्यों कभी कभी मन उदास सा हो जाता है, एकेलापन महसूस होने लगता है। बहुत ह...
2 comments:
Monday, May 14, 2018
पाँचवा मौसम -- कुंंती
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जीवन में न जाने कैसी है कमी जो अब तक न पूरी हो सकी जाने कैसी है तलाश जो आज तक अधूरी ही रही आखां में सजे सपने नए जीवन में नए रंग घुले...
कविताएं - सुजाता
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समय के तेवर और तस्वीरें कितनी ही तस्वीरें हैं घर में बिखरी हुई एलबमों में बंद दीवारों पर टंगी कैद कुछ चौखटों, अलमारियों, दराजों मे...
Sunday, March 4, 2018
कविताएँ--सुरभी आनंद
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दुर्ग जा रही है कलरव ध्वनियों ने गूँज उठाया जगत जीव द्वंद बनाने का हवन की खुशबू तेरी ओर से आई...
दो कविताएं : द विनेसेंटं माईलज (अनुवादः देव भारद्वाज)
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द विनेसेंटं माईलज ; (De Vincent Miles) फ्लिपाइंस की एक प्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका है। उन की बहुत-सी कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुक...
दो गज़लें- डॉ: आरती कुमारी,
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डॉ० आरती कुमारी गज़ल दास्तां इश्क मोहब्बत की सुनाने वाले जाने किस देश गए पिछले जमाने वाले।। कस्मों वादों की रेवायत तो अभी है लेकि...
Saturday, February 24, 2018
‘चुटकी भर मुस्कान’
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जीवन के विभिन्न आयामों में फैलती ‘चुटकी भर मुस्कान’ जीवन जहाँ प्रकृति से मिला एक अतुलनीय, अद्भूत, विलक्षण, वैभवशाली, महान् मायावी व...
सम्पादकीय- जतिंदर औलख
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समाज और साहित्यः साहित्य समाज का अभिन्य अंग होना चाहिए और साहित्य ही इंसान में इंसानियत का संचार करता है। साहित्य चाहे मौखिक हो या ...
जिज्ञायासा खरबंदा,
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जिज्ञायासा खरबंदा, शिक्षा : दसवीं (अध्ययनरत), सम्मान : ’सक्सेसर ऑफ फ्रीडम फाईटर एसोसिएशन’ एवं ’आचार्यकुल चण्डीगढ़’ द्वारा सम्मानित। अन्य : म...
कविताएं -बिरेन्द्र शर्मा ’वीर’
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बिरेन्द्र शर्मा ’वीर’’ बिरेन्द्र शर्मा ’वीर’, पिता श्री सुरेश चन्द मोद्गिल, माता श्रीमती कृष्णा देवी, जन्म 9 फरवरी 1974, शिक्षा विश्वविद्...
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